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Monday, 9 March 2015

13 . पैसा बोलता है ...

"बेईमान अमीर और ईमानदार गरीब " अक्सर सुनने में आता है. 
मैं सुनता हूँ तो इसका इसका जो पहला अर्थ  मेरे समझ में आता है वो ये  है कि संसार के सारे अमीर बेईमान होते है और संसार के सारे गरीब ईमानदार होते है. ये इसका शाब्दिक अर्थ है . जब मैं इस वाक्य की गहराई में जाता हूँ ,शब्दों के अंदर छुपी हुई भावनाओं को समझने का प्रयत्न करता हूँ तो इसका सही अर्थ समझ में आता है कि ये मुहावरा उन असफल लोगों द्वारा गढ़ा गया है जो अपनी गरीबी पर ईमानदारी का मुलम्मा चढ़ा कर खुद को संतुष्टि देना चाहते है .
वास्तव में ईमानदारी और बेईमानी चरित्र का प्रश्न है और चरित्र के मामले में दोनों ही ईमानदार हो सकते  है और दोनों ही बेईमान भी हो सकते है . 
दरअसल असफल लोगों ने , पराजित लोगों ने खुद की शर्मिंदगी कम करने के लिए या कहिये खुद को तसल्ली देने के लिए बहुत से उल-जुलूल,ना-समझी भरी बातें या कहिये मुहावरे गरीबी के समर्थन में और अमीरी के विरोध में गढ़ लिए है,प्रसारित कर दिए है ( लोमड़ी के लिए अंगूर खट्टे होते है )
कृपया इस तरह की बेवकूफी भरी बातों में उलझ कर अपना अमीरी हासिल करने का लक्ष्य ना बिसराये . हकीकत में ऐसी बातें करने वाले लोग हारे हुए खिलाडी है ,वे कोशिश करकर देख चुके और असफल हो चुके है उन्हें लगता है कि आपकी क्षमता उनसे बेहतर नहीं है और जब वे हार चुके है तो आप कैसे जीतेंगे ? वे आपको हार के दर्द से बचाना चाहते है - आपके तथाकथित शुभचिंतक जो ठहरे !!
कृपया अपने सुव्यवस्थित प्रयास जारी रखे. 
यह बात अच्छे से समझ लेवे कि जैसे शिक्षा के क्षेत्र में ग्रेजुएट होना,राजनीति के क्षेत्र में मंत्री बन जाना ,धर्म के क्षेत्र में मठाधीश बन जाना सफलता माना जाता है ठीक उसी तरह अर्थ के क्षेत्र में अमीर बन जाना सफलता का प्रतीक है  
ये वाक्य "अर्थ के क्षेत्र में अमीर बन जाना सफलता का प्रतीक है " दो बार , तीन बार ,चार बार  और जब तक आप के मन से ग्लानि ना हट जाये तब तक पढ़ने लायक है . 
सुबोध 
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Sunday, 8 March 2015

12. पैसा बोलता है ...


पैसा किसी काले व्यक्ति से नहीं कहता कि तुम काले हो इसलिए मैं तुम्हारे पास नहीं आऊंगा  और न ही ये किसी गोरे व्यक्ति से उसके गोरेपन  के कारण नाराज़ रहता है  . ये उस बीमारी से ग्रस्त है जिस बीमारी का नाम" कलर ब्लाइंड" है .
पैसा शिक्षित या अशिक्षित में कोई फर्क नहीं करता - यहाँ शिक्षित से मेरा तात्पर्य अकादमिक शिक्षा से है .
पैसा जाति देखकर चुनाव नहीं करता कि मैं ऊँची जाति वालों के घर में ही रुकुंगा या नीची जाति वालों के घर मैं ही रुकुंगा.
इसी तरह से पैसा ये नहीं कहता कि मैं अमुक धर्म वालों के पास ही रहूँगा  और दुसरे धर्म वालों के पास नहीं रहूँगा .
पैसा किसी की आर्थिक स्थिति से भी प्रभावित नहीं होता कि अमीर के पास ही रहेगा,गरीब के पास नहीं रहेगा या नहीं होगा. 
और तो और पैसा  तो उम्र को भी अहमियत नहीं देता .
ये संसार के सारे बंधनो से आज़ाद है !! 
यह सबको खुली चुनौती देता है कि आओ मुझे हासिल करो ......
अगर कोई कहता है 'मुझे दौलत चाहिए' तो उसे अपनी काबिलियत साबित करनी होगी 
और अगर कोई कहता है 'मुझे दौलत नहीं चाहिए' तो ज़ाहिर सी बात है ये उसको मिलेगी.भी नहीं .
पुरानी कहावत है काबिल आदमी इसे हासिल करता है और नाकाबिल बहाने बनाता है .

सुबोध -
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Saturday, 7 March 2015

11 . पैसा बोलता है ...

 मेरी पिछली सारी पोस्ट कंडीशनिंग को लेकर लिखी गई है , अब जब आपने कंडीशनिंग के बारे में काफी कुछ पढ़ लिया है और अपनी आज की स्थिति के मूल में क्या है ये भी समझ लिया है तो अब आप  नये तरीके से सोचना -समझना और करना शुरू करें .

पैसे को लेकर आपके मन में जो भी गलत धारणाएँ बनी है, बनाई गई है उन सबको सिरे से ख़ारिज कर देवे . जो आपसे पैसे की बुराई करता है ,आप सिर्फ उसकी मानसिकता को समझने का प्रयास करें और उन कारणों को भी जिस वजह से वो ऐसा कर रहा है फिर देखें कि कही इसी से  मिलती-जुलती फाइल आपके दिमाग में तो नहीं है जो गलती से आप डिलीट करना भूल गए हो ? अगर है तो उसे तत्काल डिलीट कर देवे ,नकारात्मक विचारों का साथ वर्तमान और भविष्य बिगाड़ने के अलावा कोई उपलब्धि नहीं दे सकता . 
ध्यान रखे पैसा तटस्थ होता है वो खुद में कभी गलत नहीं होता, कुछ लोग जो अमीर बन जाते है, बन पाते है ये उनकी काबिलियत होती है . 
जो आपसे कहते है कि ये लोग गलत तरीके से अमीर बने है उन्होंने  संभवतः सिक्के का आधा हिस्सा ही देखा होता है  क्योंकि जिस वर्ग से वे आते है उस वर्ग के खेल के नियम अमीरों के खेल के नियम से अलग होते है ,  अपने वर्ग के नियमों के अनुसार वे सही हो सकते है लेकिन उन्हें अमीरों के खेल के नियम पता नहीं होते लिहाजा अधूरी जानकारी होने की वजह से वे गलत हो जाते है.  उनके तर्क बड़े गौर से सुने ,उन्हें समझे और देखे कि वे गलत कहाँ है, अगर आपके समझ में नहीं आये तो किसी सी.ए. से ,किसी फाइनेंसियल प्लानर से या समाज के सम्मानित व्यक्ति से पूछे बशर्ते वो खुद अमीर हो !  अमीरों की सोच समझने के लिए या तो आपको अमीर होना पड़ेगा या उनका सोचने का तरीका समझना पड़ेगा . 
कृपया ये समझ लेवे अमीरों का सोचना समझना और करना बिलकुल अलग तरीके का होता है अगर आपने  अब भी अपने दिमाग से  "गरीबी" नामक सॉफ्टवेयर डिलीट नहीं किया है तो आपके समझ में ये तरीका नहीं आएगा . 
ये ध्यान रखे लाइम लाइट में रहने वाले लोगों को पता होता है हम हमेशा निशाने पर रहेंगे लिहाजा वे कानून का अक्षरशः पालन करते है - और अमीर वर्ग हमेशा ही लाइम लाइट में रहा है, रहेगा !. अमूनन कोई भी अमीर गलत नहीं होता है बस उनके खेल अलग होते है,खेलने के पाँसे अलग होते है,खेल के नियम अलग होते है और सारा फर्क इसी बात से पड़ता है !! 
- सुबोध 
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Thursday, 5 March 2015

10 . पैसा बोलता है ...

हम कारण और  परिणाम की दुनिया में रहते है जो कुछ करते है उसके पीछे कोई न कोई  कारण होता है और उस  कारण की वजह से हम कार्य करते है .ज़ाहिर सी बात है किये हुए कार्य का परिणाम भी मिलेगा . 
आपकी कंडीशनिंग आपके विचारों को पैदा करती है ,आपके विचार आपकी भावनाओं को , भावनाएं कार्य और कार्य परिणामों को .
अगर आपको अपनी कंडीशनिंग बदलनी है तो पहले स्वयं में स्वीकृति  पैदा करें कि " हाँ ,मुझमें  ये गलत कंडीशनिंग हुई है"
 कब हुई , कहाँ से हुई ,कैसे हुई ,क्यों हुई इन सब की विस्तृत डिटेल तैयार करें 
जब आपको ये पता चल जाता है कि  सोचने का वर्तमान तरीका आपका स्वयं का नहीं है बल्कि किसी और का है तो अब आप चुनाव कर सकते है कि  आगे इसी तरीके से सोचना जारी रखा जाए या और कोई नया तरीका अपनाया जाए . 
जब आप ये सब स्थिति समझ लेवे तब आप स्वयं को नए सिरे से रि -कंडिशन कर सकते है -- जो आपका खुद का सोचने का तरीका होगा ,अपने भविष्य को ध्यान में रखते हुए अपनी जरूरत के अनुसार आप अब खुद के नियम बना सकते है .
- सुबोध 
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Wednesday, 4 March 2015

9. पैसा बोलता है ...


अगर आपको अहसास हो रहा है कि आपकी  कंडीशनिंग गलत हुई है और उसे सुधारा जाना चाहिए तो  आपको कुछ चरणो से गुजरना पड़ेगा , आइये उन चरणों को समझ लेवे -
1 ) जानकारी- आप किसी भी चीज़ को जब स्वीकार करते है कि हाँ, मुझ में यह दिक्कत है .तभी उस बारे में कुछ हो सकता है . अगर आप उसका होना ही स्वीकार नहीं करेंगे,उसके अस्तित्व से ही इंकार करेंगे तो ज़ाहिर सी बात है उस बारे में कुछ किया भी नहीं जा सकता . अमूनन जब हम अपनी कंडीशनिंग को बदलने की  बात कर करते है तो ज्यादातर लोग उसके अस्तित्व से ही इंकार कर देते है और बरसों से पाली हुई धारणाओं की रक्षा के लिए दिमाग नाम का स्टोर रूम अजीब-अजीब से तर्क देता है और उसका सबसे प्रिय तर्क" भाग्य " होता है .

2 ) जानना  - जब आप ये स्वीकार कर लेते है कि ये कंडीशनिंग गलत है,उचित नहीं तब आपको ये समझना है ,जानना है कि ये सोच पैदा कहाँ से हुई ये कौन सी कंडीशनिंग है- शाब्दिक ,अनुसरणात्मक या विशिष्ट घटनात्मक  ,उस घटना ,उस सोच को बराबर समझे उसका विश्लेषण करेंगे तो आपको समझ में आएगा कि आपकी आज की स्थिति उस घटना की वजह से है आपको बाहर जो परिणाम मिल रहे है उसकी वजह आपके दिमाग में भरा हुआ उस घटना का असर है.पेड़ पर जो फल आ रहे है उसकी वजह जड़ है जिसे उस घटना ने क्षतिग्रस्त कर दिया है . 
3 ) जान छुड़ाना - जब आप ये समझ लेते है कि ये सोचने ,समझने और करने का तरीका आपका  अपना नहीं है बल्कि किसी घटना विशेष ने आपके दिमाग में ये फाइल स्टोर की है तो आपको इस फाइल को डिलीट करना पड़ेगा.
कृपया इसे बराबर समझ लेवे आपका कोई दोस्त अपने लैपटॉप के साथ-साथ आपके लैपटॉप पर भी कोई ऐसा सॉफ्टवेयर  डाउनलोड कर देता है जो आपके काम का नहीं है और  जिससे आपके लैपटॉप की स्पीड स्लो हो जाती है तो आप क्या करेंगे ?
क्या ये समझदारी नहीं है कि आप उस सॉफ्टवेयर को डिलीट कर देवे ?
अगर आपके दोस्त को  उस सॉफ्टवेयर की जिसकी खासियत है कि वो लैपटॉप की स्पीड स्लो कर देता है , ज़रुरत होगी तो अपने लैपटॉप से इस्तेमाल कर लेगा, आप अपने लैपटॉप पर ये अत्याचार क्यों होने देवे ?
तो जब आप अपनी गलत कंडीशनिंग को समझ लेते है और ये जान लेते है कि ज़िन्दगी में आपकी रूकावट की वजह वो गलत इस्टॉल की गई फाइल है  तो उसे भी दिमाग से डिलीट कर देवे . उन चीज़ों से ,धारणाओं से,सोच से मोहब्बत रखने से कोई फायदा नहीं है जो ज़िन्दगी में आपको पीछे रखे हुए है .
 अब जब आप इन तीनो चरणो से गुजर चुके है तो आप कोरे है और नए सिरे से अपनी ज़िन्दगी को आकार देने को तैयार है . अपने दिमाग में अब आप  अमीरी के ,सफलता के ,ऊंचाइयों के तरीके  इनस्टॉल करेंगे !
- सुबोध 

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Tuesday, 3 March 2015

8 . पैसा बोलता है ...


बचपन में धन और धनी लोगों के मामले में हमारे अनुभव कैसे थे ?  ये अनुभव इस मामले में महत्त्वपूर्ण है कि हमारा "आज "सालों बाद भी उस अनुभव से प्रभावित है !
अगर आपने किसी गरीब आदमी को पैसे के अभाव में मरते देखा है और उसी दरम्यान किसी अमीर को अपनी अमीरी का भोंडा प्रदर्शन करते देखा है तो  आश्चर्य  नहीं आप गरीब के लिए सहानुभूति  रखे  और अमीर से नफ़रत करें ! ऐसी स्थिति में आपकी कंडीशनिंग ये होगी कि अमीर बुरे होते है वे बेज़रूरत पैसे खर्च कर देते है बजाय किसी गरीब को बचाने के . अब जब इस तरह की कंडीशनिंग आपकी बन जाती है तो आप जब भी आपके पास अमीरी आएगी आप उस अमीरी से दूर हट जायेंगे क्योंकि आपके दिमाग के स्टोर रूम  में जो फाइल इंस्टॉल है वो तो अमीर न बनने की है क्योंकि अमीर बुरे होते है. इस तरह की खास घटनाये भी आपकी कंडीशनिंग करती है ,जिसे हम तीसरे तरीके की कंडीशनिंग कहेंगे .
यानि पहली  कंडीशनिंग शाब्दिक दूसरी अनुसरण करना और तीसरी विशिष्ट घटनाये .
दिमाग सही तरीके से काम करे इसके लिए आपकी सोच और समझ का दायरा बड़ा होना चाहिए  लेकिन ऐसा होता नहीं है पहली बात हम  किसी भी बात पर बिना ढंग से सोचे समझे तत्काल प्रतिक्रिया व्यक्त करते है अमूनन हम दिमाग से नहीं दिल से सोचते है लिहाजा हमारे निर्णय और हमारी कंडीशनिंग भावनात्मक होती है .दूसरी बात जब एक बार हम अपनी कोई राय बना लेते है तो ये " ईगो  " वाली बात हो जाती है - येन-केन प्रकारेण हम उसे सही ठहराने का प्रयास करते है और दिमाग  नाम का स्टोर रूम हमेशा आपकी सोच की रक्षा के लिए तैयार रहता है आपकी सोच के अनुकूल तर्क आपके सामने रखता रहता है !
मैंने कंडीशनिंग पर इतने विस्तार से इसलिए लिखा है क्योंकि  यही आपकी गरीबी और अमीरी का मूल तत्व है यही आपके अमीरी या गरीबी नामक पेड़ की जड़ें है . अगर आप गलत कंडीशनिंग के शिकार है तो उसे सुधारा जा सकता है , सुधार के तरीके पर अगली पोस्ट में ...
सुबोध 
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