6 . पैसा बोलता है ...
आप अगर गरीब है या मुश्किल से गुजारा कर पाते है या अमीर है ,जैसे भी है ये आपकी कंडीशनिंग की वजह से है . पैसे को लेकर आपकी जो कंडीशनिंग हुई है आप उसी के अनुसार बने है , आप चाहे जितने शिक्षित हो,आप चाहे जितना कमाते हो लेकिन आपकी कंडीशनिंग में अगर "अमीरी से नफरत" नामक सॉफ्टवेयर इंस्टॉल किया गया है तो आप कभी अमीर नहीं बन सकते. आप कमाए हुए पैसे को जायज या नाजायज किसी भी तरीके से खर्च कर देंगे , बर्बाद कर देंगे .
इसे थोड़ा अलग तरीके से समझे --
डॉगी में "बॉक्सर" फाइटर ब्रीड होती है - ये मीडियम साइज की होती है और खूंखार होती है ,जब पहली दफा हम इसके पिल्ले को घर पर लाये थे तो सभी ने इसका विरोध किया था कि ऐसी ब्रीड घर पर नहीं रखी जाती खासकर ३ बैडरूम वाले फ्लैट में ,लेकिन हमने उसे अपने पास रखा और आज वो हमारे दिए गए निर्देशों के अनुसार खूंखार नहीं है -हमने उसकी कंडीशनिंग से खूंखारता नामक शब्द हटा दिया !!
एक बाज़ का अंडा मुर्गी के घोंसले में गिर जाता है और वो चूजे की तरह व्यवहार करना सीख जाता है और मुर्गा बन जाता है .
एक खूंखार और खतरनाक शेर पालतू बन जाता है , बहुत से ऐसे उदाहरण है जो कंडीशनिंग की ताकत बताते है.
तो कंडीशनिंग वह ताकत है, वो अवस्था है जिसमे अच्छे खासे इंसान को बर्बाद करने की क्षमता होती है !! आपके पैसे को मिटटी में तब्दील करने की इसमें क्षमता होती है , पैसे को छोड़िये आपके हष्ट-पुष्ट शरीर को भी बर्बाद करने की इसमें क्षमता होती है .
जब आप रोड से गुजरते है तो थोड़ी अपनी ऑंखें खुली रखिये और दिमाग को केंद्रित कर उन हष्ट-पुष्ट भिखारियों को देखिये जिनमे से 90 % को उनकी कंडीशनिंग ने भिखारी बनाया हुआ है .
कंडीशनिंग जीवन के हर क्षेत्र में काम करती है - हर क्षेत्र यानि हर क्षेत्र - कोई भी क्षेत्र ऐसा नहीं है जो इस से अछूता हो , आप माने या माने संसार की सबसे बड़ी ताकत यही है .
यही आपकी गरीबी की वजह है और यही आपकी अमीरी की वजह !!!
- सुबोध
-www.vipcrowdfunding.com
आप अगर गरीब है या मुश्किल से गुजारा कर पाते है या अमीर है ,जैसे भी है ये आपकी कंडीशनिंग की वजह से है . पैसे को लेकर आपकी जो कंडीशनिंग हुई है आप उसी के अनुसार बने है , आप चाहे जितने शिक्षित हो,आप चाहे जितना कमाते हो लेकिन आपकी कंडीशनिंग में अगर "अमीरी से नफरत" नामक सॉफ्टवेयर इंस्टॉल किया गया है तो आप कभी अमीर नहीं बन सकते. आप कमाए हुए पैसे को जायज या नाजायज किसी भी तरीके से खर्च कर देंगे , बर्बाद कर देंगे .
इसे थोड़ा अलग तरीके से समझे --
डॉगी में "बॉक्सर" फाइटर ब्रीड होती है - ये मीडियम साइज की होती है और खूंखार होती है ,जब पहली दफा हम इसके पिल्ले को घर पर लाये थे तो सभी ने इसका विरोध किया था कि ऐसी ब्रीड घर पर नहीं रखी जाती खासकर ३ बैडरूम वाले फ्लैट में ,लेकिन हमने उसे अपने पास रखा और आज वो हमारे दिए गए निर्देशों के अनुसार खूंखार नहीं है -हमने उसकी कंडीशनिंग से खूंखारता नामक शब्द हटा दिया !!
एक बाज़ का अंडा मुर्गी के घोंसले में गिर जाता है और वो चूजे की तरह व्यवहार करना सीख जाता है और मुर्गा बन जाता है .
एक खूंखार और खतरनाक शेर पालतू बन जाता है , बहुत से ऐसे उदाहरण है जो कंडीशनिंग की ताकत बताते है.
तो कंडीशनिंग वह ताकत है, वो अवस्था है जिसमे अच्छे खासे इंसान को बर्बाद करने की क्षमता होती है !! आपके पैसे को मिटटी में तब्दील करने की इसमें क्षमता होती है , पैसे को छोड़िये आपके हष्ट-पुष्ट शरीर को भी बर्बाद करने की इसमें क्षमता होती है .
जब आप रोड से गुजरते है तो थोड़ी अपनी ऑंखें खुली रखिये और दिमाग को केंद्रित कर उन हष्ट-पुष्ट भिखारियों को देखिये जिनमे से 90 % को उनकी कंडीशनिंग ने भिखारी बनाया हुआ है .
कंडीशनिंग जीवन के हर क्षेत्र में काम करती है - हर क्षेत्र यानि हर क्षेत्र - कोई भी क्षेत्र ऐसा नहीं है जो इस से अछूता हो , आप माने या माने संसार की सबसे बड़ी ताकत यही है .
यही आपकी गरीबी की वजह है और यही आपकी अमीरी की वजह !!!
- सुबोध
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इसे थोड़ा अलग तरीके से समझे --
डॉगी में "बॉक्सर" फाइटर ब्रीड होती है - ये मीडियम साइज की होती है और खूंखार होती है ,जब पहली दफा हम इसके पिल्ले को घर पर लाये थे तो सभी ने इसका विरोध किया था कि ऐसी ब्रीड घर पर नहीं रखी जाती खासकर ३ बैडरूम वाले फ्लैट में ,लेकिन हमने उसे अपने पास रखा और आज वो हमारे दिए गए निर्देशों के अनुसार खूंखार नहीं है -हमने उसकी कंडीशनिंग से खूंखारता नामक शब्द हटा दिया !!
एक बाज़ का अंडा मुर्गी के घोंसले में गिर जाता है और वो चूजे की तरह व्यवहार करना सीख जाता है और मुर्गा बन जाता है .
एक खूंखार और खतरनाक शेर पालतू बन जाता है , बहुत से ऐसे उदाहरण है जो कंडीशनिंग की ताकत बताते है.
तो कंडीशनिंग वह ताकत है, वो अवस्था है जिसमे अच्छे खासे इंसान को बर्बाद करने की क्षमता होती है !! आपके पैसे को मिटटी में तब्दील करने की इसमें क्षमता होती है , पैसे को छोड़िये आपके हष्ट-पुष्ट शरीर को भी बर्बाद करने की इसमें क्षमता होती है .
जब आप रोड से गुजरते है तो थोड़ी अपनी ऑंखें खुली रखिये और दिमाग को केंद्रित कर उन हष्ट-पुष्ट भिखारियों को देखिये जिनमे से 90 % को उनकी कंडीशनिंग ने भिखारी बनाया हुआ है .
कंडीशनिंग जीवन के हर क्षेत्र में काम करती है - हर क्षेत्र यानि हर क्षेत्र - कोई भी क्षेत्र ऐसा नहीं है जो इस से अछूता हो , आप माने या माने संसार की सबसे बड़ी ताकत यही है .
यही आपकी गरीबी की वजह है और यही आपकी अमीरी की वजह !!!
- सुबोध
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5 . पैसा बोलता है ...
जब
आपको बार-बार एक ही बात एक या अलग-अलग तरीके से कही या समझाई जाती है तो
आप उसे मानसिक तौर पर सच मानने लगते है, जैसे क्लासरूम में मैथ्स का टीचर
किसी सवाल के किये गए गलत हल के बाद आपको बार-बार नाकाबिल बताता है और यही
बातें टीचर की देखा-देखी आपके क्लासमेट्स भी आपको कहते है , दोहराते है .
अपनी कमजोरी को आप बार-बार सुनते है आपके अवचेतन मन तक आपकी कमजोरी का
सन्देश बार-बार पहुंचता है तो आप लगातार दोहराये जाने वाले शाब्दिक
कंडीशनिंग के शिकार हो जाते है और मैथ्स आपकी कमजोरी हो जाती है और मजे
की बात ये है कि आपके टीचर और आपके क्लासमेट्स को पता ही नहीं होता कि
उन्होंने किसी का अच्छा-खासा दिमाग बर्बाद कर दिया है , संसार के अधिकांश
बच्चों को स्कूल नामक संस्था में अनजाने में ही नकारा और कमजोर बना दिया
जाता है और इस बात का उन्हें इल्म तक नहीं होता !!!
अगर आपमें सही तरीके से
सोचने समझने की शक्ति है और आप उनकी निगेटिव आलोचना को पॉजिटिव लेते है तो
मैथ्स के आप ब्रिलियंट स्टूडेंट हो सकते है लेकिन बच्चो में इतनी गहरी
समझ नहीं होती कि वे तर्क सहित अपने दिमाग को सही राह पर रख सके. लिहाजा वे
उसे ही सच मान लेते है जिसे बारबार सुनते है .
यही कंडीशन जीवन के अलग
-अलग क्षेत्रो में होती है और आदमी का अवचेतन मन इन्ही से आपको दिशाएँ
बताता रहता है ,वो वही बाहर निकालता है जो उसके अंदर डाला गया है बिलकुल
कंप्यूटर की प्रोग्रामिंग की तरह . अगर आप कम्पुयटर इस्तेमाल करते है तो
समझ सकते है कि कंप्यूटर के कुछ पार्ट सिर्फ पार्ट है जिसका उपयोग अंदर के
प्रोग्राम के अनुसार कार्य करना भर है तो समझ लेवे आपका शरीर तो आपके अंदर
के प्रोग्राम के अनुसार प्रतिक्रिया कर रहा है ,आपने अंदर क्या डाला है
,कितना डाला है,सही डाला है या गलत डाला है ये देखना शरीर का काम नहीं है ,
ये देखना आपके दिमाग का काम है और जो आप लगातार डालते है वही आपकी
कंडीशनिंग बन जाती है.
अगर पैसे को लेकर आपके
पेरेंट्स ने , परिवार के लोगों ने, यार -दोस्तों ने , टीचर्स ने कहा है
कि हर कोई अमीर नहीं बन सकता तो आप की कंडीशनिंग यही होगी कि" हर" कोई अमीर
नहीं बन सकता और हर कोई में आप भी "हर" है . अगर आप पर्याप्त बड़े हो गए है
और बनी हुई कंडीशनिंग को कैसे हटाया जाता है इसे जानते है और पुरानी
प्रोग्रामिंग को हटा देते है तो आपके अमीर बनने के पूरे चांसेज है .
शब्दों को बोलने और सुनने से पैदा हुई कंडीशनिंग को शाब्दिक कंडीशनिंग कहते है .
-सुबोध
www.vipcrowdfunding.com
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4 . पैसा बोलता है ...
कंडीशनिंग को समझने के लिए अमूनन जो उदाहरण लिया जाता है उसे ही ले रहा हूँ .
जब हाथी का बच्चा छोटा होता है तो उसे मजबूत रस्सी से बांध दिया जाता है वो मासूम बच्चा खुद को रस्सी से छुटाने की बड़ी कोशिश करता है लेकिन रस्सी मजबूत होती है और वो छूट नहीं पाता, लगातार कोशिश करने और लगातार हारने के बाद धीरे-धीरे ये बात उसके दिमाग में घर कर जाती है कि रस्सी बहुत मजबूत है और मैं आज़ाद नहीं हो पाउँगा . एक दिन वो हाथी वयस्क हो जाता है अब रस्सी उसकी ताकत से कमजोर है लेकिन चूँकि ये उसके दिमाग में बैठा हुआ है कि रस्सी मजबूत है सो वो प्रयत्न ही नहीं करता - हाथी के दिमाग में जो बैठाया गया है कि तुम रस्सी के मुकाबले कमजोर हो इसे ही कंडीशनिंग कहते है कुछ लोग इसे ब्रेन वाश करना भी कहते है ..
बचपन में बहुत से लोगों के साथ पैसे को लेकर इसी तरह की कंडीशनिंग की जाती है . जैसे अपनी गरीबी की मजबूरी की वजह से या खुद की नाक़ाबिलियत को जायज़ ठहराने के लिए या अपनी विपरीत परिस्थितियों की वजह से - कारण जो भी हो माँ-बाप जब बच्चे से ये कहते है "पैसा बुराई की जड़ है " और समर्थन में कुछ उदहारण देते हो तब लगातार ऐसा सुनते-सुनते बच्चे के दिमाग में ये बात बैठ जाती है . वयस्क होने पर भी ये बात उसके दिमाग से नहीं निकलती . और क्योंकि वो पैसे को बुराई की जड़ मानता है सो जैसे ही उसके पास पैसा आता है वो उस तथाकथित बुराई की जड़ से छुटकारा पाने का प्रयास करता है और येन-केन-प्रकारेण सफल हो जाता है . वो व्यक्ति पैसे को रोक कर भी रखना चाहे तो रोक कर रख नहीं पाता क्योंकि यहाँ उसका अवचेतन मन अपनी सक्रिय भूमिका निभा रहा है .दिमाग चाहता है पैसा रोककर रखे लेकिन दिल इस बुराई की जड़ से छुटकारा चाहता है ध्यान रहे दिल ( अवचेतन मन ) और दिमाग की लड़ाई में अमूनन दिल जीतता है और मजे की बात ये है कि इस पूरी प्रक्रिया में उसको पता ही नहीं चलता कि वह किसी कंडीशनिंग का शिकार है.
- सुबोध
कंडीशनिंग को समझने के लिए अमूनन जो उदाहरण लिया जाता है उसे ही ले रहा हूँ .
जब हाथी का बच्चा छोटा होता है तो उसे मजबूत रस्सी से बांध दिया जाता है वो मासूम बच्चा खुद को रस्सी से छुटाने की बड़ी कोशिश करता है लेकिन रस्सी मजबूत होती है और वो छूट नहीं पाता, लगातार कोशिश करने और लगातार हारने के बाद धीरे-धीरे ये बात उसके दिमाग में घर कर जाती है कि रस्सी बहुत मजबूत है और मैं आज़ाद नहीं हो पाउँगा . एक दिन वो हाथी वयस्क हो जाता है अब रस्सी उसकी ताकत से कमजोर है लेकिन चूँकि ये उसके दिमाग में बैठा हुआ है कि रस्सी मजबूत है सो वो प्रयत्न ही नहीं करता - हाथी के दिमाग में जो बैठाया गया है कि तुम रस्सी के मुकाबले कमजोर हो इसे ही कंडीशनिंग कहते है कुछ लोग इसे ब्रेन वाश करना भी कहते है ..
बचपन में बहुत से लोगों के साथ पैसे को लेकर इसी तरह की कंडीशनिंग की जाती है . जैसे अपनी गरीबी की मजबूरी की वजह से या खुद की नाक़ाबिलियत को जायज़ ठहराने के लिए या अपनी विपरीत परिस्थितियों की वजह से - कारण जो भी हो माँ-बाप जब बच्चे से ये कहते है "पैसा बुराई की जड़ है " और समर्थन में कुछ उदहारण देते हो तब लगातार ऐसा सुनते-सुनते बच्चे के दिमाग में ये बात बैठ जाती है . वयस्क होने पर भी ये बात उसके दिमाग से नहीं निकलती . और क्योंकि वो पैसे को बुराई की जड़ मानता है सो जैसे ही उसके पास पैसा आता है वो उस तथाकथित बुराई की जड़ से छुटकारा पाने का प्रयास करता है और येन-केन-प्रकारेण सफल हो जाता है . वो व्यक्ति पैसे को रोक कर भी रखना चाहे तो रोक कर रख नहीं पाता क्योंकि यहाँ उसका अवचेतन मन अपनी सक्रिय भूमिका निभा रहा है .दिमाग चाहता है पैसा रोककर रखे लेकिन दिल इस बुराई की जड़ से छुटकारा चाहता है ध्यान रहे दिल ( अवचेतन मन ) और दिमाग की लड़ाई में अमूनन दिल जीतता है और मजे की बात ये है कि इस पूरी प्रक्रिया में उसको पता ही नहीं चलता कि वह किसी कंडीशनिंग का शिकार है.
- सुबोध
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3 . पैसा बोलता है ...
एक सबसे बड़ी समस्या जो आती है वो ये कि आप पैसा कमाते है अच्छे से कमाते है फिर भी रोक कर ,इकठ्ठा करकर नहीं रख पाते . इस बात की गहराई से जांच करें कि पैसे को लेकर आपके अवचेतन मन में क्या है ? क्या ऐसे या इनसे मिलते जुलते वाक्य आपने सुने है या ऐसे किसी वाक्य में आप यकीन करते है -
पैसा बुराई की जड़ है .
अमीर बनने के लिए गलत काम करने पड़ते है
अमीर लालची होते है
अमीर टैक्स की चोरी करते है ,करप्शन को बढ़ावा देते है
अमीर स्वार्थी होते है
अमीर घमंडी होते है
अमीर चरित्रहीन होते है
पैसा ख़ुशी नहीं खरीद सकता
पैसा कमाने के लिए खून -पसीना एक करना पड़ता है
हर कोई अमीर नहीं बन सकता
पैसा पेड़ों पर नहीं उगता
पैसा हम जैसे लोगों के नसीब में नहीं है
पैसा हाथ का मैल है
पैसे के पीछे भागनेवाले पागल होते है
उपरवाला दो वक्त की रोटी ठीक-ठाक दे रहा है ज्यादा पैसे का क्या करना है
जिसने चोंच दी है चुग्गा भी वही देगा
मुसीबत के वक्त के लिए पैसा बचा कर रखो
रहने दो, हम इसका खर्च नहीं उठा सकते
अपनी इच्छाओं को कंट्रोल करना सीखो
गरीबों का ध्यान उपरवाला रखता है
स्वास्थ्य ही सर्वोत्तम धन है
कृपया इन शब्दों की गहराई में जाए . ये वे शब्द है जो आपको अमीर बनने से रोक रहे है ,( ऐसे
शब्द या तो पैसे की बुराई कर रहे है या पैसे की अहमियत को नकार रहे है या
आपका ध्यान पैसे से हटाकर और कहीं केंद्रित करने का प्रयास कर रहे है )अगर
आपके सामने आपके बड़े-बुजुर्गों,सगे-सम्बन्धियों ने, दोस्तों ने ,मिलने-जुलने
वालों ने ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया है या उनके व्यवहार में ऐसा कुछ
आपने होते देखा है तो कृपया चेक करें कि वे शब्द अब भी अवचेतन में असर तो
नहीं डाल रहे है - कहीं ये कंडीशनिंग तो नहीं है .
किसी बिल्डिंग की नींव कमजोर हो ऊपर के हिस्से को चाहे जितना सुन्दर बना लेवे ,नतीजा
क्या होगा आप जानते है . आप चाहे जितना कमा लेवे लेकिन जब आपकी अतीत की
कंडीशनिंग ( आपकी ज़िन्दगी की नींव ) ही सकारात्मक नहीं हुई है तो नतीजा
तो नकारात्मक होना ही है.
-सुबोध
एक सबसे बड़ी समस्या जो आती है वो ये कि आप पैसा कमाते है अच्छे से कमाते है फिर भी रोक कर ,इकठ्ठा करकर नहीं रख पाते . इस बात की गहराई से जांच करें कि पैसे को लेकर आपके अवचेतन मन में क्या है ? क्या ऐसे या इनसे मिलते जुलते वाक्य आपने सुने है या ऐसे किसी वाक्य में आप यकीन करते है -
पैसा बुराई की जड़ है .
अमीर बनने के लिए गलत काम करने पड़ते है
अमीर लालची होते है
अमीर टैक्स की चोरी करते है ,करप्शन को बढ़ावा देते है
अमीर स्वार्थी होते है
अमीर घमंडी होते है
अमीर चरित्रहीन होते है
पैसा ख़ुशी नहीं खरीद सकता
पैसा कमाने के लिए खून -पसीना एक करना पड़ता है
हर कोई अमीर नहीं बन सकता
पैसा पेड़ों पर नहीं उगता
पैसा हम जैसे लोगों के नसीब में नहीं है
पैसा हाथ का मैल है
पैसे के पीछे भागनेवाले पागल होते है
उपरवाला दो वक्त की रोटी ठीक-ठाक दे रहा है ज्यादा पैसे का क्या करना है
जिसने चोंच दी है चुग्गा भी वही देगा
मुसीबत के वक्त के लिए पैसा बचा कर रखो
रहने दो, हम इसका खर्च नहीं उठा सकते
अपनी इच्छाओं को कंट्रोल करना सीखो
गरीबों का ध्यान उपरवाला रखता है
स्वास्थ्य ही सर्वोत्तम धन है
कृपया इन शब्दों की गहराई में जाए . ये वे शब्द है जो आपको अमीर बनने से रोक रहे है ,( ऐसे
शब्द या तो पैसे की बुराई कर रहे है या पैसे की अहमियत को नकार रहे है या
आपका ध्यान पैसे से हटाकर और कहीं केंद्रित करने का प्रयास कर रहे है )अगर
आपके सामने आपके बड़े-बुजुर्गों,सगे-सम्बन्धियों ने, दोस्तों ने ,मिलने-जुलने
वालों ने ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया है या उनके व्यवहार में ऐसा कुछ
आपने होते देखा है तो कृपया चेक करें कि वे शब्द अब भी अवचेतन में असर तो
नहीं डाल रहे है - कहीं ये कंडीशनिंग तो नहीं है .
किसी बिल्डिंग की नींव कमजोर हो ऊपर के हिस्से को चाहे जितना सुन्दर बना लेवे ,नतीजा
क्या होगा आप जानते है . आप चाहे जितना कमा लेवे लेकिन जब आपकी अतीत की
कंडीशनिंग ( आपकी ज़िन्दगी की नींव ) ही सकारात्मक नहीं हुई है तो नतीजा
तो नकारात्मक होना ही है. -सुबोध
--------------------------------------------------
2 . पैसा बोलता है ...
बुराई की जड़ क्या है ?
पैसे से प्यार
या
पैसे से नफ़रत
इसके
जवाब में कुछ लोग कहते है कि पैसे से प्यार बुराई की जड़ है क्योंकि पैसा
पाने के लिए आप गलत काम करते है , लोगों को धोखा देते है , टैक्स की चोरी
करते है , पैसे कमाने के पीछे इतने पागल हो जाते है कि परिवार से दूर हो
जाते है, धर्म से दूर हो जाते है , लिहाजा पैसे से प्यार नहीं करना चाहिए ,
उसके लिए पागल नहीं होना चाहिए .आदमी को इतना ही कमाना चाहिए कि उसका
गुजारा हो जाए .संग्रह करने की तो ज़रुरत ही नहीं है जब ऊपरवाले ने पेट दिया
है तो रोटी भी वही देगा ,इतने पशु है पक्षी है वो कौनसा संग्रह करते है
,देता है न उनको उपरवाला .
क्या आप इन तर्कों से सहमत है ?
अगर आप इन तर्कों से सहमत है तो इनमे और कौन से तर्क जोड़ना चाहेंगे ?
और
अगर इन तर्कों से सहमत नहीं है तो क्यों नहीं है , उस स्थिति में आप ऊपर दिए गए तर्कों का क्या जवाब देंगे ?
कृपया इस पोस्ट को बराबर पढ़े , समझे और तब जवाब देवे .
ये जवाब आपकी मानसिकता का प्रतिनिधित्व करेंगे उस मानसिकता का जिस पर आपकी अमीरी या गरीबी निर्भर है !!!!
- सुबोध
बुराई की जड़ क्या है ?
पैसे से प्यार
या
पैसे से नफ़रत
इसके जवाब में कुछ लोग कहते है कि पैसे से प्यार बुराई की जड़ है क्योंकि पैसा पाने के लिए आप गलत काम करते है , लोगों को धोखा देते है , टैक्स की चोरी करते है , पैसे कमाने के पीछे इतने पागल हो जाते है कि परिवार से दूर हो जाते है, धर्म से दूर हो जाते है , लिहाजा पैसे से प्यार नहीं करना चाहिए , उसके लिए पागल नहीं होना चाहिए .आदमी को इतना ही कमाना चाहिए कि उसका गुजारा हो जाए .संग्रह करने की तो ज़रुरत ही नहीं है जब ऊपरवाले ने पेट दिया है तो रोटी भी वही देगा ,इतने पशु है पक्षी है वो कौनसा संग्रह करते है ,देता है न उनको उपरवाला .
क्या आप इन तर्कों से सहमत है ?
अगर आप इन तर्कों से सहमत है तो इनमे और कौन से तर्क जोड़ना चाहेंगे ?
और
अगर इन तर्कों से सहमत नहीं है तो क्यों नहीं है , उस स्थिति में आप ऊपर दिए गए तर्कों का क्या जवाब देंगे ?
कृपया इस पोस्ट को बराबर पढ़े , समझे और तब जवाब देवे .
ये जवाब आपकी मानसिकता का प्रतिनिधित्व करेंगे उस मानसिकता का जिस पर आपकी अमीरी या गरीबी निर्भर है !!!!
- सुबोध
पैसे से प्यार
या
पैसे से नफ़रत
इसके जवाब में कुछ लोग कहते है कि पैसे से प्यार बुराई की जड़ है क्योंकि पैसा पाने के लिए आप गलत काम करते है , लोगों को धोखा देते है , टैक्स की चोरी करते है , पैसे कमाने के पीछे इतने पागल हो जाते है कि परिवार से दूर हो जाते है, धर्म से दूर हो जाते है , लिहाजा पैसे से प्यार नहीं करना चाहिए , उसके लिए पागल नहीं होना चाहिए .आदमी को इतना ही कमाना चाहिए कि उसका गुजारा हो जाए .संग्रह करने की तो ज़रुरत ही नहीं है जब ऊपरवाले ने पेट दिया है तो रोटी भी वही देगा ,इतने पशु है पक्षी है वो कौनसा संग्रह करते है ,देता है न उनको उपरवाला .
क्या आप इन तर्कों से सहमत है ?
अगर आप इन तर्कों से सहमत है तो इनमे और कौन से तर्क जोड़ना चाहेंगे ?
और
अगर इन तर्कों से सहमत नहीं है तो क्यों नहीं है , उस स्थिति में आप ऊपर दिए गए तर्कों का क्या जवाब देंगे ?
कृपया इस पोस्ट को बराबर पढ़े , समझे और तब जवाब देवे .
ये जवाब आपकी मानसिकता का प्रतिनिधित्व करेंगे उस मानसिकता का जिस पर आपकी अमीरी या गरीबी निर्भर है !!!!
- सुबोध
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1 . पैसा बोलता है ...
ये वो शै है
जो दुनिया को नचाती है ,गरीब तो गरीब पैसे वाला भी इसकी धुन पर नाचता है
,बच्चा हो या बुढ्ढा, साधु हो या गृहस्थ कोई भी इसके मोह से नहीं बच पाया
है ,जिसके पास नहीं है वो तो इसे चाहता ही है लेकिन जिसके पास है वो भी
इसे चाहता है इसकी खूबसूरती वही समझ सकता है जिसके पास ये है और इसकी तड़फ
वही समझ सकता है जिसके पास ये नहीं है ,संसार के सारे ऐशो आराम ,सारी
सुविधाये इसी में समाई है , इसके बारे में ढेरों तरीके से लिखा गया है
,बड़े-बड़े विद्वानों ने अलग-अलग तरीके से इसकी व्याख्या की है , इसे पाने
के,हासिल करने के अजब-गजब तरीके बताये है . कोई बिरला ही होगा जो इसके पीछे
पागल नहीं है , इसकी ताकत इतनी ज्यादा है कि संसार के अधिकांश युद्ध इसी
के लिए लड़े गए संसार के अधिकांश धर्म इसे निषिद्ध घोषित करते है फिर भी
इसके बिना उनका काम नहीं चलता ..
जी हाँ , इस ताकतवर ,कद्दावर शै को दुनिया जिस नाम से बुलाती है साधारण जुबान में उसे पैसा कहते है ,जो अनमोल है अपने आप में बेजोड़ है !!!
ये ब्लॉग पैसे के बारे में ही है . निवेदन आपसे ये है कि इसमें मेरे अनुभव,मेरे सच,मेरे तरीके मैंने बताये है हो सकता है वे अनुभव,वे सच,वे तरीके आपके लिए कारगर न हो क्योंकि मेरी परिस्थितियाँ और आपकी परिस्थितियां अलग-अलग हो सकती है ,और उसी के मुताबिक अनुभव,सच और तरीके भी बदल जाते है , मेरी बात को पढ़िए ,समझिए लेकिन मानिए मत क्योंकि अपने सच की तलाश व्यक्ति को खुद ही करनी पड़ती है ,अपने तरीके खुद बनाने पड़ते है और ज़ाहिर सी बात है अनुभव तो अलग ही मिलेंगे !तो आइये उस रास्ते पर बढे जिसे लोग अमीरी का रास्ता कहते है .......
सुबोध
जी हाँ , इस ताकतवर ,कद्दावर शै को दुनिया जिस नाम से बुलाती है साधारण जुबान में उसे पैसा कहते है ,जो अनमोल है अपने आप में बेजोड़ है !!!
ये ब्लॉग पैसे के बारे में ही है . निवेदन आपसे ये है कि इसमें मेरे अनुभव,मेरे सच,मेरे तरीके मैंने बताये है हो सकता है वे अनुभव,वे सच,वे तरीके आपके लिए कारगर न हो क्योंकि मेरी परिस्थितियाँ और आपकी परिस्थितियां अलग-अलग हो सकती है ,और उसी के मुताबिक अनुभव,सच और तरीके भी बदल जाते है , मेरी बात को पढ़िए ,समझिए लेकिन मानिए मत क्योंकि अपने सच की तलाश व्यक्ति को खुद ही करनी पड़ती है ,अपने तरीके खुद बनाने पड़ते है और ज़ाहिर सी बात है अनुभव तो अलग ही मिलेंगे !तो आइये उस रास्ते पर बढे जिसे लोग अमीरी का रास्ता कहते है .......
सुबोध


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