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Thursday, 30 April 2015

24. पैसा बोलता है ...

जो शख्स कंडीशनिंग का शिकार होता  है वो कंडीशनिंग का शिकार होने के बावजूद स्वयं को स्वस्थ और नार्मल मानता है .उसे आसानी से ये बात समझ में नहीं आती कि उसके निर्णय उसके नहीं होकर उस व्यक्ति के है जिसको देखकर,सुनकर वो ऐसा बना और विकसित हुआ है .

 सालों से ऐसा व्यवहार करते और होते रहने की वजह से ये उसका  कम्फर्ट जोन हो गया है इससे बाहर झांकना उसके  लिए तकलीफदेह होता है लिहाजा वो  अपने खोल में ही सिमटे रहना चाहता  है ,अगर आप उसको  बतायेगे कि उसका  खोल पुराना हो गया है या गंदला गया है तो वो  आपसे नाराज हो जायेगा  और धर्म,समाज,परिवार ,अतीत वगैरह के उदाहरण दे कर खुद को जायज ठहराने का प्रयास करेगा  . 
पिछले दिनों मेरे घर पर मेरा एक दोस्त आया हुआ था उसने रिस्ट वाच पहनी हुई थी , करीबन दो घंटे गप-शप   करने के बाद उठने से पहले उसने समय देखने के लिए अपने मोबाइल का इस्तेमाल किया तो मुझसे रहा नहीं गया मैंने उससे पूछा कि जब तुमने समय अपने मोबाइल से ही देखना है तो तुमने घड़ी क्यों पहनी हुई है,तुम्हारी तो घड़ी भी एक आर्डिनरी घड़ी है कोई डिज़ाइनर या एंटीक  टाइप की भी नहीं है.
मेरा दोस्त पढ़ा लिखा है सालों से मोबाइल ( MOBILE ) इस्तेमाल कर रहा है ,मोबाइल के ढेरों फीचर्स उसकी जानकारी में है लेकिन उसने जो जवाब दिया वो  जवाब हैरान करने वाला था "क्योंकि मेरे पिताजी और दादाजी भी घड़ी पहनते थे इसलिए मैंने घड़ी पहनी हुई है !!!!  "
कुछ लोग समय में जम जाते है ! मेरा दोस्त समय में जम गया है ,उसके दिमाग की कंडीशनिंग ऐसी हो गई है कि घड़ी का उसके लिए कोई भी व्यवहारिक उपयोग न होने के बावजूद वो घड़ी का वजन अपनी कलाई पर ढोता है .
मुझे रिस्ट  वाच पहने हुए करीबन दस साल गुजर गए है !!! 
आपको ?
अगर आपने मोबाइल होने के बावजूद  घड़ी पहनी हुई है तो चेक करें आपने घड़ी क्यों पहनी है ?
क्या आपके पास ऐसा कोई जवाब है जिससे आप खुद को कह सके कि मैं किसी कंडीशनिंग का शिकार नहीं हूँ .अगर आपने ऐसा कोई कारण ढूँढ लिया है तो शुरू का पहला पैराग्राफ पढ़ लेवे !!! 
हो सकता है धन के मामले में हम  किसी कंडीशनिंग का शिकार हो और हमे इसका पता ही नहीं हो !

-सुबोध 
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Wednesday, 29 April 2015

23 . पैसा बोलता है ...

 

ज्यादातर लोगों के पास न पैसे बनाने की क्षमता होती है और न सम्हालने की .
कुछ लोगों के पास पैसे बनाने की क्षमता होती है लेकिन उन्हें पैसे सम्हालने नहीं आते .
बहुत कम लोगों को पैसा बनाना भी आता है और सम्हालना भी .
आप किस वर्ग में है ?


सुबोध -
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Saturday, 25 April 2015

22 . पैसा बोलता है ...

पैसे का बहाव बरकरार रखने या पैसे का रिसाव रोकने के लिए सवालों का सामना कीजिये

सबसे अच्छे दोस्त वो सवाल होते है जो आपको मुश्किलों में डालते है
क्या
क्यों
कब
कैसे
कहाँ
……. ?
…….?
सवाल जो भी हो उत्तरों में ईमानदार रहिये ,आपकी समस्या के समाधान के रास्ते आपको नज़र आने लगेंगे.


सुबोध -
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Friday, 24 April 2015

21 . पैसा बोलता है ...


कहते है पैसा चलायमान होता है .
सवाल ये है कि ये आपके पास चलकर आ रहा है या आपके पास से चलकर जा रहा है.
चुनौती ये है कि अगर चलकर आ रहा है तो इस आवक को बरक़रार कैसे रखा जाये और अगर आपके पास से चलकर जा रहा है तो इसे कैसे रोका जाये .
इस संसार में पाने वाले भी बहुत है और खोने वाले भी .
आप किस वर्ग में आते है ?


सुबोध -
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Thursday, 23 April 2015

20 . पैसा बोलता है ...

अमीरी या गरीबी का निर्णय  ऊँची सैलरी या ऊँची कमाई नहीं होता है बल्कि कमाए गए पैसे में से आपने बचाया क्या है , इस से होता है .

" अ " लाख रूपये महीने कमाने वाला बंदा जिसका खर्च 98  हज़ार रूपया महीना है ,और" ब "  जो 30  हज़ार रूपया महीने का कमाता है उसका खर्च 27 हज़ार है तो अमीर "अ" नहीं" ब" होता है अगर 5  साल यानि 60 महीने बाद की इनकी स्थिति समझी जाए तो "अ" 1  लाख  20  हज़ार का और "ब" 1लाख 80 हज़ार का मालिक होता है और ये तो सीधी सी गणित है . 
"अ" खर्चे में, लिविंग स्टैण्डर्ड में  आपको अमीर लग सकता है और "ब" गरीब  लेकिन" अ"  और" ब" की 5  साल बाद की बैलेंस शीट जो कहती है वो कुछ अलग ही कहानी है .छोटी सी लगनेवाली 1 हज़ार की एक्स्ट्रा बचत लम्बे समय में कितना बड़ा फर्क  बनती है ये इस उदाहरण  से स्पष्ट है .
                        ये बात अच्छे से समझ लेवें कौन कितना कमाता है, उसका लिविंग स्टैंडर्ट कैसा है अमीरी के खेल में  इस से कोई फर्क नहीं पड़ता , अंत में कौन कितना जोड़ पाता है  , बैलेंस शीट किसकी मजबूत है -फर्क इस से पड़ता है.
             अमूनन अमीर लगने वाले डॉक्टर  ,वकील, चार्टेड अकाउंटेंट जैसे लोगों की स्थिति अंदर से कुछ और हो सकती है .
  

- सुबोध 
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Wednesday, 22 April 2015

19 . पैसा बोलता है ...


सपने छोटे क्यों ?

छोटी सोच वाले
छोटे सपने देखते है
और सिर्फ देखते है.......

-

बड़े सपने देखने पर
शुभचिंतक हो जाते है दहशतज़दा
वे ढूंढते है
बड़ी समस्याओं के लिए
छोटे-छोटे समाधान.

-
नहीं समझ पाते
कि सपने
देखने से नहीं
बल्कि पूरे होते है
सुव्यवस्थित प्रयास से ,
नहीं समझ पाते
कि वे इस किनारे पर है
दुसरे पर उनके सपने
और बीच में समस्याओं की नदी .

-
उन्हें सिर्फ बनाना है एक पुल
इस किनारे से उस किनारे तक
उन्हें पुल बनाने का
जुटाना है सामान
पैदा करनी है काबिलियत
उसके बाद
सपने उनके होंगे.
हाँ, जो भी देखे होंगे,
चाहे बड़े हो या छोटे.
तो छोटे क्यों ?

सुबोध- १४ मई,२०१४



Tuesday, 21 April 2015

18 . पैसा बोलता है ...


अमीर बनने के लिए आपके पास एक ठोस कारण  होना चाहिए जो आपमें इतनी आग पैदा कर सके कि आप मंज़िल पा सके . मंज़िल दूर नहीं है सिर्फ एक बेहतरीन प्लानिंग करकर शुरुआत भर करनी है, बाकि सब अपने आप होता जायेगा - आपका कारण,आपका सपना आपसे करवा लेगा . अगर आपके पास ऐसा कोई कारण नहीं है जो आपको अमीर बनने की  प्रेरणा दे सके तो आपको इतना बता दूँ  अमीर बनने में बहुत-बहुत ज्यादा मेहनत होती है , मंज़िल तक ले जाने वाली सड़क बहुत उबड़-खाबड़ है उसमें ढेरों गड्ढे है और सफलता की सम्भावना भी न के बराबर है. तो बेहतर है पहले एक कारण, एक सपना पैदा कीजिये जो आपको पागल कर सके ,जो आपके होश उड़ा सके , तब इस खेल में शामिल होइए.
-सुबोध
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Monday, 20 April 2015

17 . पैसा बोलता है ...


भाग्य खैरात नहीं देता

मैंने
पढ़ा
सोचा
समझा
अवसर देखा
सीखा
किया
और तुमने
पढ़ा
सोचा
समझा
कठिनाईयाँ देखी
और छोड़ दिया.
अब तुम कहते हो
मुझे सफलता भाग्य से खैरात में मिली है.
क्या तुम नहीं जानते
मैंने चूमे है ढेरों मेंढक
पाने को राजकुमार
और तुम छुप गए कछुए के खोल में
बचाने को अपने होठों की खूबसूरती.
मेरे दोस्त !
सफलता भाग्य से मिलती है
लेकिन भाग्य खैरात नहीं देता
क्योंकि
सफलता और भाग्य दोनों
सतत प्रयासों का परिणाम है
जहाँ सिर्फ पड़ाव होते है
मंज़िल नहीं ...

सुबोध
 

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Friday, 10 April 2015

16 . पैसा बोलता है ...

 पैसे के लिए बुराई की जड़,हाथ का मैल,पाप की कमाई जैसे विशेषणों का इस्तेमाल करने वाले  शख्स से पैसे के बारे में बात करना एक तकलीफदेह अनुभव होता है . ऐसे शख्स को  पैसे की बुनियादी समझ नहीं होती है सो  पैसा इनके  लिए मज़ाक की बात होती है या फिर ये  लोग अपनी असफलता को जायज ठहराने के लिए कुतर्कों का सहारा लेते है लिहाजा ये  पैसे को ही नाजायज ठहरा देते है  , हकीकत में ये  अपनी खिसियाहट छुपा रहे होते है .

             अगर उनके कुतर्कों का जवाब कुतर्क से ही देना हो तो कुछ जवाब ये हो सकते है -
             अगर पैसा बुराई की जड़ है तो बुराई का पेड़ तो बड़ा विशाल होगा और आश्चर्य ,उस बुराई के पेड़ से अमीरों के लिए सुविधाएँ बरसती है और गरीबों के पास  बुराई की जड़ नहीं है तो उनके लिए तकलीफे हाज़िर हो जाती है !
            अगर पैसा हाथ का मैल है तभी तो गरीब आदमी उस मैल से शीघ्रातिशीघ्र छुटकारा पा लेता है क्योंकि मैल के साथ चिपके रहना उचित नहीं है ! 
            अगर पैसा पाप की कमाई है तो खुश हो जाइये मरने के बाद गरीबों को स्वर्ग मिलेगा और अमीरों को नरक - अगर होता हो तो ! इस जनम में तो स्थिति उलटी सी है !
         हकीकत में ये अपनी अधूरी जानकारी और समझ को लेकर ज़िन्दगी की कठिन डगर को और कठिन बना रहे है ऐसे लोग खुद के साथ-साथ अपने परिवार और रिश्तेदारों  के लिए  भी खतरनाक होते है . गाहे-बगाहे ये अपनी सोच को अन्य लोगो पर भी थोपने का प्रयास करते रहते है ! 
           ऐसे शख्स अगर आपके साथी है तो बेहतर है इनकी पैसे को लेकर नकारात्मक धारणाओं को आप अनसुना कर देवे ,ये खुद भीड़-भाड़ वाले रास्ते पर है और आपको भी उसी रास्ते पर चलाना चाह रहे है जो कतई  उचित नहीं है !!
- सुबोध 

Thursday, 9 April 2015

15 . पैसा बोलता है ...


            मेरे पास अमूनन कमेंट आते है कि आदमी को मन से अमीर होना चाहिए .पैसा प्रेम जितना महत्त्वपूर्ण नहीं है ,सबसे बड़ी दौलत दोस्ती होती है ,परिवार का प्यार ही सच्ची अमीरी है वगैरह...

             क्या आप भी ऐसा ही सोचते है अगर सोचते है तो आप गलत ट्रैक पर है !

            आप भौतिक  आवश्यकताओं, जरूरतों  को नकार नहीं सकते जिसे पैसा पूरी करता है .

            इसी तरह आप भावनात्मक जरूरतों ,आवश्यकताओं को भी नहीं नकार सकते जिससे  आप अपने परिवार,अपने दोस्तों,रिश्तेदारों के जरिये स्वयं को संपूर्ण करते है .

            मेरे अनुसार यह तुलना ही बेमानी है यह तुलना बिलकुल वैसी ही है कि आपसे पूछा जाये आपके लिए भौतिक जगत   महत्वपूर्ण है या भावना जगत  ?

           इसे साधारण , समझ में आने वाले उदहारण से  समझने के लिए आप समझे कि आपसे पुछा जाये आपके लिए आपके हाथ महत्व पूर्ण है या पैर ?

         आपके लिए यकीनन दोनों ही महत्वपूर्ण है .

           पैसा उन क्षेत्रों में बहुत महत्वपूर्ण है जिनमें ये काम करता है ,और उन क्षेत्रों में बहुत महत्वहीन है जिनमें ये काम नहीं करता .हो सकता है आपकी अन्य भावनाओ से दुनिया चलती हो लेकिन उनसे आप किसी हॉस्पिटल का बिल नहीं चुका सकते,स्कूल की फीस नहीं भर सकते,रोज़मर्रा की ज़रूरतें पूरी नहीं कर सकते.

          अब भी आपको यकीन नहीं है तो अपनी इन भावनाओं की हकीकत समझने के लिए इनमे से किसी से एक बड़ी रकम उधार लीजिये और फिर उसे भूल जाइये ,जल्द ही आप को यकीन हो जायेगा कि पैसे के क्षेत्र में पैसा कितना महत्वपूर्ण है .
सुबोध -
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Wednesday, 8 April 2015

14. पैसा बोलता है ...

          एक मुहावरा बार-बार सुनने में आता है" पैसे का क्या है ,पैसा तो हाथ का मैल है "

          मैं सोचता हूँ क्या पैसा वाकई हाथ का मैल होता है ? क्या आप अपने शरीर पर मैल रहने देते है ? कोई भी मैल क्यों इकठ्ठा करेगा - सब तो सफाई चाहते है !!,एक बात तो पक्की है कि ऐसी सोच वालों के पास पैसा होता  नहीं है , टिकता नहीं है  क्योंकि इस तरह के वाक्य यही साबित करते है कि हमें पैसे की कोई कदर नहीं है और जिस चीज़ की आपको कदर नहीं होती है वो आपके पास टिकती भी नहीं है .

          एक बात और, ऐसे वाक्य कोई भी अमीर इस्तेमाल नहीं करता क्योंकि उसे ये पता होता है कि " पैसा बहुत कुछ होता है"  और  पैसा हाथ का मैल  नहीं बल्कि उसकी जी-तोड़ मेहनत का फल है ,नतीजा है और मेहनत से कमाई हुई,हासिल की हुई चीज़ की दिल एवं दिमाग में कदर होती है ,उसके लिए कोई ओछे और हलके शब्दों का इस्तेमाल नहीं करता - मजाक में भी नहीं !!

        इस तरह के शब्द या तो गरीब इस्तेमाल करते है या जिन्होंने खुद के दम पर ,अपनी मेहनत और लगन से इसे नहीं कमाया या हासिल किया होता है !

         शब्द आपकी जिंदगी का प्रतिबिम्ब होते है ये आपके अतीत से बनते है वर्तमान से सँवरते है और भविष्य का निर्माण करते है ,इनकी ताकत अनुपम होती है ,इन्हे बोलने और सुनने में सावधानी बरते ,अगर आप ऐसे लोगों के संपर्क में है जो इस तरह के नकारात्मक शब्दों का,वाक्यों का इस्तेमाल करते है तो आप अपने भविष्य को लेकर सावधान हो जाइये !! शब्दों की ताकत को समझिए वे आपको अपरिवर्तित नहीं रहने देते , नकारात्मकता हमेशा खतरनाक होती है,अगर आप अमीरी की डगर पर चलने के इच्छुक है तो जितनी जल्दी हो सके ऐसे शब्दों,वाक्यों को कहने वालों से दूरी बना ले !!!
सुबोध

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