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Friday, 27 November 2015

130. सही या गलत -निर्णय आपका !


जब लक्ष्य बनाने की बात आती है तो ज्यादातर लोग इसे मजाक में लेते है !!
उन्हें लक्ष्य की आवश्यकता और अहमियत समझ में नहीं आती , उन्हें लक्ष्य बनाना गैरजरूरी और बोझिल लगता है .
वे जैसा कि मैंने अपनी पोस्ट 113  में लिखा है चाहना,चुनना और समर्पण में फर्क ही नहीं कर पाते .
उन्हें ये अंदाजा ही नहीं होता कि हमे अपनी जीत किस स्तर पर जाकर स्वीकार करनी है ? वे निशाना कहाँ साध रहे है ?
तीन वक्त की रोटी पर ,गाड़ी पर , बंगले पर ?
वे लाख रुपये साल का कमाना चाहते है या महीने का या दस लाख महीने का या एक करोड़ महीने का ?
उनके दिमाग में कोई स्पष्ट खाका नहीं होता कि किस स्तर को पाने के लिए उन्हें क्या कीमत चुकानी होगी ?
आर्थिक स्वतंत्रता का लक्ष्य बनाना तो बहुत दूर की बात है ,उन्हें तो ये समझ में ही नहीं आता कि ऐसा कोई कांसेप्ट होता है और उसे हासिल किया जा सकता है.
वे दौड़ते रहते है , प्रयास करते रहते है ,ज़िन्दगी रूपी प्लेग्राउंड में उस फुटबॉल को लेकर जिसके लिए उनकी निगाहों में कोई गोल पोस्ट नहीं है - उन्होंने बनाया नहीं है !!!! 
ज़िन्दगी अपनी रफ़्तार से चलती है वो आपको कुछ न कुछ बनाएगी जरूर .अगर आपने लक्ष्य बना रखा है तो आप उसके अनुरूप बनेंगे और अगर लक्ष्य नहीं बनाया है तो आप वो बनेंगे जो शायद आप बनना नहीं चाहें . जब कुछ न कुछ बनना ही है तो क्यों न वो बने जो बनना चाहते है !!!!
सुबोध
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Thursday, 26 November 2015

129. सही या गलत -निर्णय आपका !


ज़िन्दगी में लक्ष्य  तय किये बिना शुरुआत  करना वैसा ही है जैसा फुटबॉल खेलते वक्त गोल पोस्ट का पता न होना ,वो  बड़ी ही हास्यास्पद स्थिति होती है जब एक फुटबॉल खिलाडी के पास फुटबॉल हो लेकिन उसे ये पता न हो कि गोल कहाँ करना है . अगर आप फुटबॉल मैच के दर्शक हो तो क्या ऐसी टीम को सपोर्ट करेंगे जिसके खिलाडी को ये भी पता नहीं हो कि गोल कहाँ करना है ? अगर नहीं तो क्यों ?

आपको शायद पढ़कर अच्छा नहीं लगे लेकिन हकीकत और  दुःख  की बात ये है कि संसार के अधिकांश लोग  इसी वर्णित खिलाडी  की नुमाइंदगी करते है !! 

ऐसा  पत्र  जिसमे बहुत अच्छी-अच्छी ज्ञान भरी बातें लिखी हो लेकिन जिसके लिफाफे  पर पता नहीं लिखा हो वो बिना पता लिखा हुआ लिफाफा पोस्टमैन कहाँ डिलीवरी करेगा ? संसार में बहुत से ऐसे लोग होते है जिन्हे बहुत कुछ पता होता है, ज्ञान का भण्डार होते है, जिनके दिमाग में कूट-कूट कर नए-नए आइडियाज भरे होते है लेकिन वो कहीं नहीं पहुंचते ,क्यों नहीं पहुंचते क्या कभी आपने सोचा ?
अब गौर कीजियेगा - उनके लिफाफे पर लक्ष्य रूपी पता नहीं लिखा होता !!!!! .
गरीबी की बड़ी वजहों में से एक लक्ष्य का निर्धारण न करना  है .
सुबोध 

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128. सही या गलत -निर्णय आपका !

अमीर मानसिकता के लोगों को अपनी कार्यक्षमता पर


 भरोसा होता है लिहाजा वे अपने प्रदर्शन ( Result ) के


 आधार पर पेमेंट माँगते है , जबकि गरीब मानसिकता


 के लोग समय के आधार पर पेमेंट माँगते है .

-सुबोध


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Tuesday, 24 November 2015

127. सही या गलत -निर्णय आपका !

आज़ादी, स्वतंत्रता जैसे शब्दों की गहराई में जाए तो समझ में आता है कि जिसे हम आज़ादी कहते है वो अपने अंदर एक जिम्मेदारी समेटे है .आपको खुश होने की आज़ादी तब है जब आप खुश होने के लिए किये जानेवाले कार्यों की जिम्मेदारी लेते है . आपको अपनी संतान को संतान कहने की आज़ादी  तब है जब आप उनके भरण- पोषण की जिम्मेदारी लेते है . आपको अपनी बीमारी से आज़ादी तब मिलती है जब आप डॉक्टर द्वारा दी गई हिदायतों को जिम्मेदारी से पूरा करते है . आपको दोस्त को दोस्त कहने की  आज़ादी  तब है जब आप दोस्ती नामक लफ्ज़ के साथ जुडी जिम्मेदारियों का निर्वाह करते है .

                 आपके जीवन के हर पहलु के साथ आज़ादी जुडी हुई है और उस आज़ादी के साथ एकजिम्मेदारी भी . वो आपके जिम्मेदारी से किये गए कार्यों का परिणाम  है कि कई तरह के  दुखों से,अभावों  से आपको आज़ादी मिली है ,और आप एक सुविधापूर्ण जीवन जी पा रहे है .
            आपके एक कलीग को इन्क्रीमेंट मिलता है दुसरे को नहीं ,आपने सोचा क्यों होता है ऐसा ?
             आपके साथ खेला-कूदा बड़ा हुआ एक दोस्त आज पैसे में खेलता है और दूसरा दो वक्त की रोटी भी ढंग से नहीं जुटा पाता ,  क्यों?
           मजाक  की बात ये है कि अधिकांश लोग जिम्मेदारी नामक लफ्ज़ से दूर भागते है, जहाँ तक होता है इससे बचते है .
           आज़ादी का एक अर्थ जैसा कि मैंने ऊपर बताया  जिम्मेदारी है उसी के अनुसार गुलामी का अर्थ गैर-जिम्मेदारी हो जाता है .
          मुझे शायद ये बताने की जरूरत नहीं है कि आज़ादी और गुलामी  में से आपको किसका चुनाव करना चाहिए , क्यों करना चाहिए और मेरे इस वाक्य का सही अर्थ क्या है !
- सुबोध 

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Friday, 20 November 2015

126. सही या गलत -निर्णय आपका !

वित्तीय बुद्धि आपको यह सिखाती है कि शांत पड़े तालाब  में तरंगे कैसे पैदा की जाए , जब स्थिति सामान्य हो या मार्किट तेजी में हो तो कोई भी पैसा बना सकता है ( हालाँकि ऐसा होता नहीं है लेकिन लोग ऐसा मानते है ) परन्तु जब मार्किट मंदी में  हो तब पैसा कैसे बनाया जाए . छुपे हुए अवसर को कैसे पहचाना जाए ?  समस्या को किस तरह अवसर में बदला जाए ? जब आपके पास पैसा न हो तब भी मार्किट में सौदे कैसे किये जाए, मार्किट से पैसे कैसे उगाहे जाए ? 

                       यानी ये शिक्षा ,ये बुद्धि आपके दिमाग के उस भाग को सक्रिय करती है जो वित्त से सम्बंधित है और अमूनन काम में ना लेने की वजह से कोमा में चला जाता है ..
                       सबसे महत्वपूर्ण  दक्षता  जो आपको चाहिए वो है अंको को पढ़ना और समझना यानि वित्तीय साक्षरता . लोग अंको को पढ़ना जानते है , उन्हें समझना नहीं जानते , जब किसी शब्द के साथ अंक जुड़ते है तो शब्द बदलने के साथ ही अंको के मायने भी बदल जाते है अंको के साथ ग्रॉस प्रॉफिट की बजाय नेट प्रॉफिट लिखा है तो पूरा का पूरा सन्दर्भ ही बदल जाता है यानी अगर  शब्दों के अर्थ और अंको की समझ आपको नहीं है तो उसे जानना ही आपके लिए वित्तीय बुद्धि हासिल करने का पहला कदम है . अगर आपको संपत्ति   और दायित्व   का अर्थ नहीं पता है तो अकादमिक रूप से शिक्षित होकर भी  आप वित्तीय रूप से अशिक्षित है . 
दूसरा कदम  धन से धन कैसे बनाया जाता है  , कम धन से किस तरह के सौदे करने चाहिए, उन्हें करने के  तरीके क्या है यानि कम धन से पैसा  कैसे बनाया जाता है और कई मर्तबा तो बिना धन के धन कैसे बनाया जाता है ये जानने के साथ-साथ निवेश को समझना  है.निवेश के कई इस्ट्रुमेंट्स होते है ,लोग निवेश का अर्थ   शेयर मार्किट , बैंक की जमा , प्रॉपर्टी, गोल्ड वगैरह ही मानते ,जानते है !!
                           तीसरे कदम में बाज़ार को समझना , वर्त्तमान में कितनी मांग है भविष्य में कितनी हो सकती है, पुर्ति  कितनी है भविष्य में किस तरह से पुर्ति  होगी, कितनी शॉर्टेज  रहेगी ये सब आकलन करना और इस आकलन से मार्किट में उतरने की स्ट्रैटेजी तैयार करना है इसी में ये भी ध्यान रखना है कि नई  टेक्नोलॉजी भविष्य में वर्तमान के मार्किट पर क्या और कितना प्रभाव डाल सकती है, प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करना / समझना ,नए लांच होने वाले प्रोडक्ट पर स्टडी रखना , अपने कॉम्पिटिटर की जानकारी रखना ये सब है. 
                       चौथे कदम में आपको कानून की जानकारी होनी चाहिए , जो व्यवसाय कर रहे है उस व्यवसाय में कौन -कौन से डिपार्टमेंट से क्लियरेंस आपको चाहिए , कॉर्पोरेट,स्टेट और नेशनल लॉ के बारे में जानकारी के साथ-साथ एकाउंटिंग की जानकारी भी आपको होनी चाहिए , ये ध्यान रखे वित्तीय रूप से शिक्षित व्यक्ति कानूनों का सम्मान करते है ,कानून तोड़ने जैसे पचड़े में पड़ने की बजाय वे कानून के दायरे में रहते हुए काम करते है . चूँकि उन्हें कानूनों की पूरी जानकारी होती है ,कानून में  मौजूद छिद्रो की भी .इन्ही छिद्रों का इस्तेमाल करकर वे अतिरिक्त पैसा पैदा करते है .
सुबोध

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Tuesday, 3 November 2015

125. सही या गलत -निर्णय आपका !

                       अमीर और गरीब के बीच जो सबसे महत्त्वपूर्ण फर्क है वो है विचार का - विचार के चुनाव का !!!

                       कोई भी विचार आपके दिमाग में नकारों  की तरह  नहीं रहता - वो आपके दिमाग में रहने का कुछ न कुछ असर आप पर छोड़ता ही है ,अच्छा या बुरा , खर्च या निवेश, सफलता या असफलता , मजबूती या कमजोरी ., इसलिए अपने दिमाग में किसी भी विचार को आप सोच समझ कर ठहरने देवे . 
                     मैं वापिस आपको याद दिला दूँ - विचार भावनाओ की ओर ले जाते है - भावनाएं कार्य की ओर और कार्य परिणामों की ओर . लिहाजा एक गलत विचार आपको बुरा परिणाम देगा और एक अच्छा विचार आपको सही परिणाम देगा . 
                   अब जब आप विचार-भावना-कार्य-परिणाम का आपसी सम्बन्ध समझ लेते है तो अपने दिमाग में उन्ही तरीके के विचारों को आश्रय देवे जिस तरह के विचारों को अमीर देते है , जब आप उनकी तरह सोचना, समझना और करना सीख जाते है तो उन्ही की तरह बन भी जायेंगे ....
- सुबोध 

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