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Thursday, 7 January 2016

144 . सही या गलत -निर्णय आपका !


तुम्हारा डर तुम्हारे विश्लेषण की वजह से पैदा होता है ,तुम जो जीवन का ,जीवन में होने वाली भविष्य की घटनाओं का विश्लेषण करते हो ,उनके होने का अंदाजा लगाते हो वही तुम्हे भयभीत करता है ,हालाँकि तुम्हारे अंदाज़े ,तुम्हारे विश्लेषण अधिकांश बार गलत होते है ,तुम वर्त्तमान में सिर्फ साँसे लेते हो जीते भविष्य में हो कि ये होगा ,ये नहीं होगा. तुम दिन भर भविष्य की सोचते हो , वर्तमान को जीना जब शुरू कर दोगे तो तुम्हारा डर ख़त्म हो जायेगा .
तुम्हारा अधिकार सिर्फ कर्म पर है और यही वो कार्य है जो तुम वर्त्तमान में कर सकते हो ,फल पर तुम्हारा अनुमान हो सकता है अधिकार नहीं है . क्योंकि फल पाना बहुत से अन्य कारको पर निर्भर करता है .
आइये इसे एक उदाहरण से समझे .
आप पहाड़ी सड़क से पैदल गुजर रहे है , करीबन पच्चीस फुट दूर सड़क के बाई तरफ आप एक साँप को देखते है और आप रुक जाते है , अब यही से आपका दिमाग भविष्य का अंदाजा लगाने लगता है कि अगर मैं रोड से गुजरा और साँप ने मुझे काट लिया तो ? यहाँ पास में कोई अस्पताल भी नहीं है यहाँ से शहर 10 किलोमीटर दूर है ,मैं वहां कैसे पहुंचूंगा ,वहां डॉक्टर नहीं मिला तो ? अगर मिल भी गया तो सरकारी अस्पताल में मुझे हाथोहाथ नहीं देखा तो ? घर पर मेरे पेरेंट्स को पता चलेगा तो ? मुझे देखने कौन- कौन आएगा , विनय से पिछले हफ्ते झगड़ा हो गया था क्या वो भी मुझे देखने आएगा ?
आप इस तरह की ढेरों बातें सोच रहे है उनका विश्लेषण कर रहे है ,परेशान हो रहे है तभी वहां से एक पहाड़ी गुजरता है और पूछता है " बाबूजी क्या हुआ ?"
आप इशारे से साँप को दिखाते है .
वो देखता है और हँसते हुए जवाब देता है, "बाबूजी, सर्दी के शुरूआती दिन है साँप धुप सेंकने आया है ,लेकिन डरिये मत हर साँप ज़हरीला नहीं होता ये दो मुंहा साँप है इसमें ज़हर नहीं होता ."
वह आपका हाथ पकड़ता है और खुद साँप की तरफ होकर आपको सड़क पार करवा देता है .
अब आप खुद इस घटना का विश्लेषण कीजिये .
हम ज़िन्दगी में इसी तरह के ढेरों साँपों से हर रोज़ खुद को घेर लेते है - कभी परीक्षा रुपी साँप,कभी बॉस रुपी साँप,कभी पैसे रुपी साँप यानि कुछ भी करने से पहले हम एक साँप का सामना करते है और ढेरों असम्बद्ध सवालों को सोचते है जवाब तैयार करते है ,विश्लेषण करते है - सिर्फ भविष्य को जीते है और वर्त्तमान में होकर भी वर्त्तमान को कहीं पीछे छोड़ देते है .
अगर आप वर्त्तमान को जीते तो साँप को वहां से हटाने के लिए उस पर पत्थर फेंक सकते थे, या सड़क के दुसरे छोर से गुजर सकते थे ,या किसी टहनी को , लकड़ी को अपने बचाव के लिए हथियार के तौर पर साथ लेकर चलते और भी कई रास्ते हो सकते थे लेकिन आप तो घटनाओं का विश्लेषण करने लगे और फल के तौर पर खुद को साँप का काटा हुआ मान लिया जबकि हो सकता था कि साँप आपकी पदचाप सुनकर खुद ही सड़क से हट जाता .
यानि यहाँ आप उन चीज़ों को लेकर परेशान थे जिनकी भविष्य में होने की संभावना मात्र थी लेकिन इस संभावना में आप इस कदर डूब गए कि अपने वर्त्तमान में जो आप कर सकते थे वो भी आपने नहीं किया .
अमूनन हर गरीब , असफल, हारा हुआ इंसान वही होता है वो साँप देखकर रूक जाता है और हर अमीर ,हर सफल,हर विजेता इंसान वही होता है जो साँप को देखकर डरता है लेकिन उस डर से वह रूकता नहीं है क्योंकि वो जानता है डर भविष्य के विश्लेषण में है जबकि हमारे हाथ में आज है ,हमारा वर्त्तमान है !
" डर के आगे जीत है " बच्चा-बच्चा इस वाक्य से, मोटिवेशनल वाक्य से वाकिफ है लेकिन चूँकि वो बच्चा है इसलिए इस वाक्य के अनुरूप व्यवहार नहीं कर पाता. आपने भी इस वाक्य को ढेरों बार सुना है लेकिन आप तो बच्चे नहीं है ,आप बड़ों की तरह इस डर से आगे क्यों नहीं जाते ?
अमीर और गरीब में सबसे बड़ा फर्क यही है की गरीब डर देखकर रूक जाता है जबकि अमीर डर कर रूकता नहीं है बल्कि डर का सामना करता है, उसे प्रबंधित करता है .
सुबोध 

Wednesday, 6 January 2016

143 . सही या गलत -निर्णय आपका !

मेरी पोस्ट 137 से आगे -

किसी प्रोडक्ट की सेल क्लोज करने से पहले प्रोडक्ट की खासियतों  के बारे में बताया जाता है ,इसे प्रोडक्ट का प्रचार करना भी कहते है. कुछ लोग प्रचार से चिढ़ते है जो सफलता की राह में एक बड़ी बाधा है .प्रचार से चिढना या सेल से बचने की कोशिश करना आपको मुनाफे से दूर करता है और  इस  तरह  की हरकतें अमूनन गरीब  लोग करते  है.अगर  आप  प्रचार करने और  सेल करने से बच  रहे  है तो  खुद की कीमत  कैसे  बढ़ाएंगे? ऐसी स्थिति में अगर आप किसी  कंपनी में कर्मचारी है तो कोई दूसरा एम्प्लोयी अपनी खासियतें बता कर आपसे आगे निकल जायेगा और अगर आप व्यापारी है तो  बिना अपने प्रोडक्ट की खासियत बताये लोगों की निगाहों में कैसे आएंगे ?  
पुरानी कहावत है "लोग उसकी सुनते है जो बोलता है" तो बोलिए - अपनी ,अपने प्रोडक्ट की खासियतें बताइये .
लोगों को कई कारणों से प्रचार करने या बेचने में समस्या महसूस होती है ,आइये उन्हें समझे -
1 . आपका दिमाग आपका स्टोररूम है इस स्टोररूम में आपके साथ जो भी गुजरा हो वो आप चाहे या न चाहे अलग-अलग रिलेटेड फाइल में जाकर फाइल होता रहता है .और जब उस घटना या वाक्यात के जैसा या मिलता जुलता दुबारा आपके सामने आता है तो आपके दिमाग का स्टोररूम उससे सम्बंधित फाइल आपको पकड़ा देता है कि देखो ऐसा तुम्हारे साथ पहले भी हुआ है और उसका ये परिणाम रहा था . ये सारी क्रियाएँ स्वाभाविक सी है और हम सब इस बारे में अनुभवी है .
हो सकता है आपके साथ अतीत में कुछ बुरा हुआ हो ,जब किसी ने जबरन आपको कोई सामान बेचा हो  जो आपको आपके अनुसार पूरा मूल्य नहीं दे पाया हो या बेचने वाले ने गलत तरीके से प्रचार किया हो और आप खुद को ठगा गया महसूस करते हो  या बेचने वाले ने सामान खरीदने के लिए इतना ज्यादा आपको परेशान किया हो कि आपको सेल्स के नाम से ही चिढ़ होती हो .इसलिए आप आज सेल्स को अच्छा नहीं समझते . ये आपके व्यक्तिगत अनुभव हो सकते है या सामूहिक अनुभव भी हो सकते है  .
कृपया ये ध्यान रखे आपके साथ अतीत में जो हुआ है वो एक  हादसा था और हादसों को पकड़ कर रखने से ज़िन्दगी में डर,नफरत ,निराशा और दर्द के अलावा कुछ भी हासिल नहीं होता ,ज़िन्दगी आगे बढ़ने के लिए होती है और कल का सच आज भी सच हो ये ज़रूरी नहीं . 

2 . हो सकता है आपने कभी कोई सामान बेचने की कोशिश की हो ,जिसके बारे में आपको खुद को पूरी जानकारी नहीं थी और संभावित खरीददार ने आपको नकार दिया हो ,उसने आपको इस तरह के तर्क दिये हो जिनका आप जवाब नहीं दे पाये हो या आपको बुरी तरह से फटकारा  गया हो, अपमानित किया गया हो और उस हादसे को आप अभी तक नहीं भूला पाये हो,आप उस काम के लिए ग्लानि महसूस करते हो उससे उबर  नहीं पाये हो .
 कृपया ध्यान देवे अपनी एक बार की असफलता या अस्वीकृति को ज़िन्दगी भर मत ढोयें, वो एक बार का बोझ अभी तक आपको उबरने नहीं दे रहा है उस बोझ को काँधे से , दिमाग से उतार फेंक दीजिये वो बोझ सिर्फ हाथी के  पैरों की कमजोर बेड़ी है- हाथी की ताकत से कही बहुत कमजोर उसे समझिए और कंडीशनिंग की प्रदूषित दुनिया से बाहर आकर खुली हवा में सांस लीजिये . 

3- अमूनन हम सबको ये सिखाया जाता है कि अपनी खुद की या खुद की वस्तुओं की तारीफ़ नहीं करनी चाहिए ,ये "अपने मुँह मियां मिट्ठू बनना" कहलाता है और बार बार दी गई हिदायतें ,सिखाया गया एटीकेट हमारी आदत  बन जाता है लिहाजा हम अपनी या अपनी वस्तुओं की तारीफ़ करना सभ्यता  के अनुकूल नहीं मानते ,ये संस्कार हमे सेल्स से दूर कर देते है,प्रचार से दूर कर देते है .
कृपया ध्यान देवे ये संस्कार आदिम युग के ज़माने के है जब आबादी इतनी कम थी कि लोग स्वयं एक-दूसरे के बारें में जानते थे तब उन्हें अपने बारे में बताना अपनी बड़ाई करना था , हम सदियों से उन संस्कारों को ढोये जा रहे है जो अपनी उपयोगिता खो चुके है , बल्कि यही बेवकूफी भरे संस्कार ,एटीकेट हमारी ग्रोथ में रुकावट बन गए है . हम अपने बारे में लोगों को बताते नहीं है यहाँ तक कि हमारा पडोसी भी हमारे बारें में नहीं जानता . जब तक आप अपनी या अपने प्रोडक्ट की खासियत या काबिलियत लोगों तक पहुंचाएंगे नहीं और लोगों को पता नहीं चलेगा आपकी उन्नति के मार्ग प्रशस्त नहीं होंगे ये समझ लीजिये और याद कीजिये उस पुरानी कहावत को कि "जो दिखता है वो बिकता है " तो खुद को ,अपने प्रोडक्ट को दिखाइए ,एक्सप्लेन या एडवर्टाइज  करने के नए-नए तरीके अपनाइये . 

4  . हो सकता हो आपमें सुपेरिओरिटी  काम्प्लेक्स हो कि मैं जब बेहतरीन हूँ ,मेरा प्रोडक्ट जब बहुत अच्छा है तो मुझे प्रचार की क्या ज़रुरत है लोग मुझ तक अपने-आप ढूंढते हुए आएंगे,उन्हें आना चाहिए .ये एक तरह नजरिया होता है जिसमे उच्चता की भावना प्रबल होती है इतनी प्रबल कि  उन्हें लगता है प्रचार करना मेरी शान के खिलाफ ही नहीं है बल्कि मेरा अपमान है . उन्हें लगता है कि मैं इतना खास हूँ या मेरा प्रोडक्ट इतना ज़बरदस्त है कि लोगों को किसी तरह खोज कर मेरे पास आना चाहिए . यह अहंकार का ही दूसरा रूप होता है .
जो लोग इस तरह से सोचते है या जिनकी ये मानसिकता बन गयी है जिन्होंने अपने दिमाग के दरवाज़े बंद कर लिए है उनके बारे में तय है कि ये अपने कम्फर्ट जोन में है और उनकी उन्नति की सम्भावनाये सीमित है .इस तरह की सोच उन्हें दिवालियेपन  की और धकेल रही है क्योंकि इस युग में अच्छे प्रोडक्ट्स की भरमार है और जिनके पास प्रोडक्ट है वे सुनियोजित तरीके से प्रचार के माध्यम से अपनी  पैठ ग्राहकों तक बना रहे है और आप इस घमंड में है कि मेरे बेहतरीन प्रोडक्ट की जानकारी करते हुए, ढूंढते हुए  लोग मुझ तक चला कर आएंगे .
पुराने ज़माने की कहावत कि ":बेहतर प्रोडक्ट बनाइये दुनिया आपका दरवाज़ा खटखाएगी " आज अधूरी हो गई है इसमें ये शब्द और जोड़ दीजिये तो ये पूरी हो जाएगी और ये आज का इसका वर्जन इस युग के अनुसार ज्यादा सटीक है  "बशर्ते आप दुनिया को इसके बारे में बताये  " सुपेरिओरिटी काम्प्लेक्स वालों को पुरानी कहावत याद है आधी कहावत कृपया उन्हें पूरी कहावत याद करनी चाहिए
"बेहतर प्रोडक्ट बनाइये दुनिया आपका दरवाज़ा खटखाएगी,बशर्ते आप दुनिया को इसके बारे में बताये  "

5  . हो सकता है आपकी कंडीशनिंग ऐसी हुई हो जिसमे आपको सेल्समेन  के बारे में कुछ गलत बातें बताई गई हो  ,आपके दिमाग में उनकी गलत छवि बनायीं गई हो और इसके लिए बहुत से उदाहरण बताये गए हो,दिखाए गए हो .
एक गलत तरीके की कंडीशनिंग से छुटकारा पाने के तरीके मेरी पुरानी पोस्ट्स में बताये गए है कृपया उन्हें देखे . 

ध्यान देवे अमीर लोग हमेशा बहुत अच्छे प्रचारक होते है ये अपनी खासियतों को,अपनी सेवाओं को,अपने प्रोडक्ट को  बेहतरीन पैकेजिंग में पेश करते है .ये इतने जोश और उत्साह से ये सब करते है कि उनकी मार्किट वैल्यू हमेशा बढ़ती रहती है . उनकी अमीरी का महत्वपूर्ण राज उनकी सेल्स की काबिलियत है !!
सुबोध 


http://www.rechargesathi.com

(one sim all recharge , mlm)

Tuesday, 5 January 2016

142 . सही या गलत -निर्णय आपका !

व्यवसाय चलाने के लिए टेक्नोलॉजी और व्यवहारिकता दोनों की ज़रुरत होती है .

लोगों से मिलना- जुलना सीखिये ,उनसे व्यवहार करना सीखिये व्यवहारिक बनिये , व्यवहार मार्किट में बिकनेवाली वस्तु नहीं है कि ज़रुरत हुई और जाकर खरीद लाये .
टेक्नोलॉजी और टेक्नीशियन आप फिर भी मार्किट से खरीद सकते है , ये मार्किट में मिलते है !
ध्यान देवे किसी एम्प्लोयी को उसकी किसी स्किल के कारण चुना जाता है और व्यवहारिक न होने क
ी वजह से निकाल दिया जाता है. आप अपनी स्किल की वजह से जॉब पा सकते है मगर उस जॉब को बरक़रार रखने के लिए आपमें व्यवहारिकता होनी चाहिए .स्किल आपको जॉब दिला सकती है लेकिन वो व्यवहारिकता है जो आपको जॉब में टिका सकती है .
अगर आप बिजनेसमैन है तो आपके बिज़नेस पर भी यही फंडा लागू होता है - आपकी सफलता आपकी व्यवहारिकता में है .
- सुबोध 

http://www.rechargesathi.com

Monday, 4 January 2016

141 . सही या गलत -निर्णय आपका !

बहुत से लोगों के पास बहुत सी बेहतरीन आइडियाज होती है लेकिन वो उनके दिमाग में होती है और वही दफ़्न हो जाती है वो उनकी महान आईडिया इस लायक नहीं बन पाती कि लाखो-करोडो पैदा कर सके ,इसकी मुख्य वजह ये है कि जिनके दिमाग में ये आईडिया आती है वो खुद को बहुत ही साधारण मानते है उस आईडिया पर गंभीरता से विचार और कार्य नहीं करते ,उन्हें खुद को इसकी सफलता पर संदेह रहता है . 


उनका अधूरापन उनका दुश्मन बन जाता है ,कोई और उसी आईडिया पर काम करता है और पैसों का ढेर लगा लेता है लेकिन उनकी छोटेपन की कंडीशनिंग उनका पीछा नहीं छोड़ती ,उन्हें लगता है कि ग्रेट आईडिया सिर्फ ग्रेट लोगों के ही दिमाग में आ सकते है हम जैसे साधारण लोग साधारण पैदा होते है ,साधारणता में गुजारा करते है और साधारणता में ही गुजर जाते है .
वे इस बात को नहीं समझ पाते कि विचारों पर किसी का भी एकाधिकार नहीं होता . प्रकृति ने किसी भी व्यक्ति के साथ किसी किस्म का भेद-भाव नहीं किया , सबको बराबर धूप ,बराबर पानी ,बराबर हवा, बराबर खुशबु, बराबर वक्त ,बराबर अँधेरा ,बराबर रोशनी, बराबर निराशा ,बराबर आशा,बराबर एहसास कहने का अर्थ हर चीज़ बराबर -बराबर दी है ,व्यक्ति ने अपने बैरियर्स खुद बनाये है . 

एक गरीब को लगता है कि मैं झुग्गी-झोपड़ी में रहता हूँ ,मेरे यहाँ रोशनी कम आती है ,जबकि अमीरों के बंगले में भरपूर रोशनी होती है ये उसकी सोच उसका दायरा बन जाती है और वो इस सोच को अपने दुर्भाग्य से जोड़ लेता है ,अपनी,अपने पेरेंट्स की नाकामी से जोड़ लेता है ;धीरे-धीरे यही सोच बड़ी होती जाती है ,ज़िन्दगी के दूसरे क्षेत्र में भी छाने लगती है और प्रकृति ने जिस" बराबर इंसान" को पैदा किया था वो खुद को छोटा मानने लगता है ,छोटा हो जाता है ! लिहाजा उसके दिमाग में आनेवाली महान आईडिया भी उसको बेवकूफी लगती है .

कुछ लोग झुग्गी-झोपड़ी में रहते है,जहाँ रोशनी कम आती है लेकिन वे कम रोशनी को नहीं देखते ,देखते है कि झुग्गी-झोपड़ी से निकलने के बाद रोशनी का कोई फर्क नहीं रह जाता वे प्रकृति को धन्यवाद देते है और दूसरी नियामतें जो प्रकृति ने उन्हें दी है उन पर ध्यान केंद्रित करते है और उन नियामतों की ताकत के बल पर कुछ ऐसा कर गुजरते है जो दूसरों के लिए प्रेरणा बन जाता है ,वे किसी भी तरह के बैरियर्स से खुद को आज़ाद रखते है !
ध्यान रखे हारने वाले के लिए बहाने बहुत होते है और जीतने वाले के लिए रास्ते बहुत होते है !!!
सुबोध 

140 . सही या गलत -निर्णय आपका !

           बड़ी अजीब सी सोच होती है लोगों की , उन्हें सफलता चाहिए होती है लेकिन उन्हें सफलता का शॉर्टकट चाहिए .अब उन्हें कौन समझाये और कैसे समझाये कि  कुछ चीज़ों का शॉर्टकट नहीं होता उन चीज़ों को अगर आप  शॉर्टकट से पा भी लेंगे  तो वे लम्बे वक्त तक टिकेगी नहीं . जैसे वो शॉर्टकट से आई है उसी तरह वो चली भी जाएगी ,बिना नींव के पहली बात छोटे-मोटे टेंट टाइप के मकान बन सकते है एक बड़ी और शानदार बिल्डिंग के लिए तो आपको नींव की ज़रुरत होगी .और दूसरी बात ज़िन्दगी का तूफ़ान ,एक विपरीत परिस्थिति आपकी टेंट टाइप की हैसियत को सुखहाली से  बदहाली में बदल देगी इसलिए आप एक नींव बनाये और नींव तो नींव होती है फिर वो चाहे मकान की हो ,आपकी शिक्षा की हो,आपकीअमीरी की हो  या फिर आपकी किसी अन्य सफलता की हो .

       अगर आपने अपनी नींव को मज़बूत बनाया है तो पहली बात आप सेफ है और दूसरी बात अगर किसी  हादसे के कारण आप बर्बाद भी हो जाते है तो आप दुबारा खड़े हो पाएंगे -फीनिक्स की तरह . क्योंकि नींव बनाने के दरम्यान आपने सीखा होता है कि रुकावटों से पार कैसे पाया जाता है जबकि शॉर्टकट में तो आप ज़िन्दगी की ऊंच-नीच से वाकिफ ही नहीं हो पाते .आपने सिर्फ पहाड़ की चोटी देखी है ,चढ़ाई के दौरान आनेवाली दिक्कतों को न देखा है ,न समझा है ,न महसूस किया है और न ही जीया है तो अगर चोटी से जिस दिन आप  लुढक गए उस दिन आपका  क्या होगा ? हर बार तो ज़िन्दगी शॉर्टकट से आपको  चोटी पर नहीं पहुंचा सकती है - हर दिन सट्टेबाज़ों का नहीं होता,जुआरियों का नहीं होता ,लाटरी जीतने वालों  का नहीं होता .
        अगर आपको अपनी सफलता को स्थायित्व देना है तो आपको उस लम्बे प्रोसेस से गुजरना ही होगा जहाँ आप चीज़ों को बनाना सीखते है (बना कर पाई हुई चीज़ आपको ज्यादा संतुष्टि देती है-- आपको अपनी पहली ख़रीदी गई फ्रीज़ की, गाड़ी की मनस्थिति आज भी याद होगी ! ) सम्हालना सीखते है ,बढ़ाना सीखते है . अगर आपने तुक्के में कोई  सफलता पाई है तो पहली बात आप उस सफलता को पचा नहीं पाएंगे आपको उल्टी ( vomiting  ) हो जाएगी और खुदा न खास्ता आपने उसे पचा लिया तो दूसरी बात आप उसे बढ़ा नहीं पाएंगे क्योंकि बढ़ाने में जो काबिलियत चाहिए वो काबिलियत तो आपमें है ही नहीं .तो बेहतर है रास्ता वो चुनिए जिसमे स्थायित्व हो बेशक वो चाहे लम्बा ही क्यों न हो क्योंकि उस रास्ते में हो सकता आप परेशान हो जाए,आपको जगह-जगह चोट लगे, आप चलते-चलते थक जाये,प्यास से आपका गला सूखे,भूख से आतें कुलबुलाये ,आपकी सांस फूल जाये ,हज़ार मुसीबतें आपको मिले लेकिन उस रास्ते से गुजरने के बाद आप जो पाएंगे वो स्थायी होगा और रास्ते के बीच झेली हुई मुसीबतें आपको ताकत,होंसला और सकारात्मक सोच देगी जिसका कोई भी जोड़ नहीं होता,जो खुद में अनमोल है ! 
- सुबोध


http://www.rechargesathi.com