तुम्हारा डर तुम्हारे विश्लेषण की वजह से पैदा होता है ,तुम जो जीवन का ,जीवन में होने वाली भविष्य की घटनाओं का विश्लेषण करते हो ,उनके होने का अंदाजा लगाते हो वही तुम्हे भयभीत करता है ,हालाँकि तुम्हारे अंदाज़े ,तुम्हारे विश्लेषण अधिकांश बार गलत होते है ,तुम वर्त्तमान में सिर्फ साँसे लेते हो जीते भविष्य में हो कि ये होगा ,ये नहीं होगा. तुम दिन भर भविष्य की सोचते हो , वर्तमान को जीना जब शुरू कर दोगे तो तुम्हारा डर ख़त्म हो जायेगा .
तुम्हारा अधिकार सिर्फ कर्म पर है और यही वो कार्य है जो तुम वर्त्तमान में कर सकते हो ,फल पर तुम्हारा अनुमान हो सकता है अधिकार नहीं है . क्योंकि फल पाना बहुत से अन्य कारको पर निर्भर करता है .
आइये इसे एक उदाहरण से समझे .
आप पहाड़ी सड़क से पैदल गुजर रहे है , करीबन पच्चीस फुट दूर सड़क के बाई तरफ आप एक साँप को देखते है और आप रुक जाते है , अब यही से आपका दिमाग भविष्य का अंदाजा लगाने लगता है कि अगर मैं रोड से गुजरा और साँप ने मुझे काट लिया तो ? यहाँ पास में कोई अस्पताल भी नहीं है यहाँ से शहर 10 किलोमीटर दूर है ,मैं वहां कैसे पहुंचूंगा ,वहां डॉक्टर नहीं मिला तो ? अगर मिल भी गया तो सरकारी अस्पताल में मुझे हाथोहाथ नहीं देखा तो ? घर पर मेरे पेरेंट्स को पता चलेगा तो ? मुझे देखने कौन- कौन आएगा , विनय से पिछले हफ्ते झगड़ा हो गया था क्या वो भी मुझे देखने आएगा ?
आप इस तरह की ढेरों बातें सोच रहे है उनका विश्लेषण कर रहे है ,परेशान हो रहे है तभी वहां से एक पहाड़ी गुजरता है और पूछता है " बाबूजी क्या हुआ ?"
आप इशारे से साँप को दिखाते है .
वो देखता है और हँसते हुए जवाब देता है, "बाबूजी, सर्दी के शुरूआती दिन है साँप धुप सेंकने आया है ,लेकिन डरिये मत हर साँप ज़हरीला नहीं होता ये दो मुंहा साँप है इसमें ज़हर नहीं होता ."
वह आपका हाथ पकड़ता है और खुद साँप की तरफ होकर आपको सड़क पार करवा देता है .
अब आप खुद इस घटना का विश्लेषण कीजिये .
हम ज़िन्दगी में इसी तरह के ढेरों साँपों से हर रोज़ खुद को घेर लेते है - कभी परीक्षा रुपी साँप,कभी बॉस रुपी साँप,कभी पैसे रुपी साँप यानि कुछ भी करने से पहले हम एक साँप का सामना करते है और ढेरों असम्बद्ध सवालों को सोचते है जवाब तैयार करते है ,विश्लेषण करते है - सिर्फ भविष्य को जीते है और वर्त्तमान में होकर भी वर्त्तमान को कहीं पीछे छोड़ देते है .
अगर आप वर्त्तमान को जीते तो साँप को वहां से हटाने के लिए उस पर पत्थर फेंक सकते थे, या सड़क के दुसरे छोर से गुजर सकते थे ,या किसी टहनी को , लकड़ी को अपने बचाव के लिए हथियार के तौर पर साथ लेकर चलते और भी कई रास्ते हो सकते थे लेकिन आप तो घटनाओं का विश्लेषण करने लगे और फल के तौर पर खुद को साँप का काटा हुआ मान लिया जबकि हो सकता था कि साँप आपकी पदचाप सुनकर खुद ही सड़क से हट जाता .
यानि यहाँ आप उन चीज़ों को लेकर परेशान थे जिनकी भविष्य में होने की संभावना मात्र थी लेकिन इस संभावना में आप इस कदर डूब गए कि अपने वर्त्तमान में जो आप कर सकते थे वो भी आपने नहीं किया .
अमूनन हर गरीब , असफल, हारा हुआ इंसान वही होता है वो साँप देखकर रूक जाता है और हर अमीर ,हर सफल,हर विजेता इंसान वही होता है जो साँप को देखकर डरता है लेकिन उस डर से वह रूकता नहीं है क्योंकि वो जानता है डर भविष्य के विश्लेषण में है जबकि हमारे हाथ में आज है ,हमारा वर्त्तमान है !
" डर के आगे जीत है " बच्चा-बच्चा इस वाक्य से, मोटिवेशनल वाक्य से वाकिफ है लेकिन चूँकि वो बच्चा है इसलिए इस वाक्य के अनुरूप व्यवहार नहीं कर पाता. आपने भी इस वाक्य को ढेरों बार सुना है लेकिन आप तो बच्चे नहीं है ,आप बड़ों की तरह इस डर से आगे क्यों नहीं जाते ?
अमीर और गरीब में सबसे बड़ा फर्क यही है की गरीब डर देखकर रूक जाता है जबकि अमीर डर कर रूकता नहीं है बल्कि डर का सामना करता है, उसे प्रबंधित करता है .
सुबोध
सुबोध
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