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Friday, 9 October 2015

114 . सही या गलत -निर्णय आपका !

                             गरीब मानसिकता के लोग ये सोचते है कि आमदनी ही सब कुछ है , वे मानते है कि अमीर वही हो सकता है जो ढेर सारा पैसा कमाता है , मेरा कहना ये है कि ये अमीरी  आमदनी का मामला न होकर पैसे के सुव्यवस्थित प्रबंधन का मामला है .अगर आप अलग-अलग खातों के अनुसार अपने पैसे को बाँट देते है और स्ट्रिक्टली फॉलो करते है  तो कम आमदनी के बावजूद आप आर्थिक दृष्टि से समपन्न और स्वतंत्र हो सकते है .

आइये इस बंटवारे को समझ लेवे 
10 % वित्तीय स्वतंत्रता खाता 
10  % दीर्धावधि  बचत खाता 
10  % शिक्षा खाता 
10  % मनोरंजन खाता 
10  % दान खाता , सहायता खाता 
50  % आवश्यक खाता 
   जैसे ही आपके पास पैसे आते है सबसे पहले आप उसमे से 10 % वित्तीय स्वतंत्रता खाते में डालें (पोस्ट 112  देखें ) .  इसे निहायत ज़रूरी समझे - वित्तीय स्वतंत्रता के लिए इतना ज्यादा ज़रूरी  जितना आपके ज़िंदा रहने के लिए आपका  सांस लेना ज़रूरी है  (पोस्ट 108  देखें )
अब बाकी के बचे हुए पैसे को आप अपनी ज़रुरत के अनुसार दुबारा कम - ज्यादा कर सकते है , लेकिन ये करने से पहले बेहतर है इन खातों का रोल आप समझ लेवे .
          किसी भी खाते को ख़त्म न करें क्योंकि इंसान सम्पूर्णतावादी होता है , किसी एक हिस्से को अधूरा रख कर आप उस हिस्से की या तो  गलत कंडीशनिंग कर रहे होते है या खुद को अधूरा रख रहे होते है - अमीर मानसिकता सम्पूर्णतावादी होती है किसी भी क्षेत्र में खुद को अधूरा नहीं रखती और आपको भी यही करना है .

दीर्धावधि बचत खाते का रोल ये है कि आप अपने भविष्य में पड़ने वाले मोटे खर्चे के लिए थोड़ी-थोड़ी बचत करते जाते है और लगातार बचत करते -करते ये  बचत इतनी बड़ी बन जाती है कि निर्धारित  कार्य किया जा सके , जैसे आपने फ्रिज लेना है, एयर कंडीशनर लेना है ,गाड़ी लेनी है , मकान लेना है , बच्चो की शादी करनी है , इस तरह के भविष्य में आने वाले खर्चे इसी खाते से निकाले जायेंगे , इस खाते के लिए कोई भी प्रतिशत निर्धारित करने से पहले अपने भविष्य में किये जाने वाले खर्चे की रूप-रेखा पहले तैयार कर लेवे .जैसे आपने 2 साल बाद 3 लाख की गाड़ी लेनी है , 5  साल बाद  20  लाख का फ्लैट लेना है आपकी सैलरी 50  हज़ार रूपया महीना है,   आपकी सैलरी  कितनी बढ़ेगी और खरीदी जाने वाली वस्तुएं तब किस कीमत पर होगी इसका भी हिसाब लगाएं , फिर आपको खुद निर्धारित करना है कि सैलरी का कितना % दीर्धावधि  खाते में डालना है .
- सुबोध

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