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Monday, 11 May 2015

34 . पैसा बोलता है ...

पैसे के कुछ सिद्धांत होते है .


अगर कम पैसे कमाने हो तो ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है ,काम खुद करना पड़ता है ,  मेहनत  का रूप शारीरिक होता है, एवं जिम्मेदारी कम  होती है अगर ज्यादा पैसा कमाना हो तो कम मेहनत करनी पड़ती है, काम दूसरों से करवाना पड़ता है. मेहनत का रूप मानसिक होता है ,जिम्मेदारी ज्यादा होती है. 

बहुत से लोग जो  ज्यादा पैसा कमाना चाहते है उन्हें ये बात समझ में नहीं आती कि कम मेहनत करकर भी ज्यादा पैसे कमाए जा सकते है क्योंकि उन्होंने आज तक " पैसे कमाने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है " , "हार्ड वर्क इज की ऑफ़ सक्सेस "   जैसे वाक्य सुने है,पढ़े है . 

मैं बहुत छोटे स्तर पर चीज़ों को लिख रहा हूँ विस्तार और सन्दर्भ स्वयं तलाश लीजियेगा .

कृपया बताये पेमेंट काम करने पर मिलता है या काम के परिणाम पर ?
आप को गौर से देखने पर पता चलेगा कि गरीब मानसिकता वाले लोगों के पास समय होता है लिहाजा वे अपने समय को बेचते है अपने शरीर को बेचते है यानि मज़दूरी करते है . उन्हें मजदूरी करने पर, काम करने पर, मेहनत ज्यादा करने पर  पेमेंट मिलता है .

जबकि अमीर मानसिकता के लोगों के पास दिमाग होता है लिहाजा वे अपने दिमाग को लगाते  है यानि काम करनेवाले मजदूरों को इकट्टा करते है और उनसे काम करवाते है.चूँकि वे परिणाम (RESULT ) को बेचते है तो उन्हें परिणाम देने पर पेमेंट मिलता है .

 मज़दूर को मेहनत ज्यादा करनी पड़ती है उसकी मेहनत का स्वरुप शारीरिक होता है लिहाजा वो जितनी ज्यादा मेहनत करेगा उतनी ही ज्यादा बढ़ोतरी पायेगा और उसके लिए" हार्ड वर्क इज की ऑफ़ सक्सेस" एक सही मुहावरा हो जायेगा .जिसमे काम ख़राब होने पर या मुनाफा न होने पर जिम्मेदारी उसकी नहीं होगी बल्कि मालिक या ठेकेदार की होगी . उसे अपने दिए गए समय का निर्धारित मूल्य मिलेगा .

दूसरी तरफ अमीर मानसिकता के लोगों को  पता है कि जो वस्तु ज्यादा उपलब्ध होती है उसके रेट कम होते है और जो वस्तु कम उपलब्ध होती है उसके रेट ज्यादा होते है ये मांग और आपूर्ति का मामला है .श्रम की आपूर्ति  बहुत ज्यादा है मांग से भी बहुत ज्यादा लेकिन परिणाम की आपूर्ति मांग से बहुत कम है.लिहाजा वे अपनी वित्तीय शिक्षा की बदौलत श्रम न बेचकर परिणाम  बेचते है और परिणाम बेचने के लिए मजदूरों को इकट्ठे करकर उनसे रिजल्ट लेना होता है ,वो मज़दूरों से मेहनत करवाने के लिए मैनेजर टाइप का कोई बंदा अपॉइंट  करते  है और परिणाम प्राप्त करते है . चूँकि वो खुद कुछ नहीं करते उनके  सारे काम  उनका   मैनेजर करता है लिहाजा उनके   लिए  " हार्डवर्क इज  की ऑफ़ सक्सेस "  एक गलत मुहावरा हो जायेगा .ऐसे लोगों के लिए सही मुहावरा  " स्मार्टवर्क इज  की ऑफ़ सक्सेस " होता है क्योंकि ये काम को स्मार्ट तरीके से करते है .इनकी शुरू में नेटवर्क बनाने की मेहनत ही हार्डवर्क होती है , नेटवर्क बनाने के बाद ये अपनी जिम्मेदारियाँ  दूसरों पर छोड़ते जाते है और खुद किसी अगले स्मार्टवर्क की तरफ मूव करते है .

अगले किसी प्रोजेक्ट में मजदूरों का नेटवर्क बनाने के लिए इनका मैनेजर इनके पास रहता  है  और ये एक के बाद एक इस तरह के प्रोजेक्ट करते जाते है . अगर इस कांसेप्ट को आप बराबर समझ जाते है तो ये आपके समझ में आ जायेगा कि अमीर ज्यादा अमीर क्यों बनते जाते है .

वैसे भी कहावत है आपको पहला लाख बनाने में टाइम,मेहनत,दिमाग लगाना पड़ता है फिर अगला लाख बनाने में वक्त नहीं लगता क्योंकि तब आपको  लाख बनाने का फार्मूला पता हो जाता है .
सुबोध -
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